पापी तूने अगर अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक नहीं किया तो तेरे लिंग की पुतरिया एंग्री बेंगडी हो जाएगी श्रीमती पूजा भाटी Sinner, if you don't improve your mental health, then your penis's daughter will become angry and mad, Mrs. Pooja Bhati

भागो भाT आया खेल दिवस 31 अगस्त २०२५ पापा जी जब से बिहार 
Subtitles होकर आए हैं तब से उनका लिंग उत्तेजित ही नहीं हुआ है श्रीमती पूजा भाटी खेल दिवस 31 अगस्त























२०२५
पापी तूने अगर अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक नहीं किया तो तेरे लिंग की पुतरिया एंग्री बेंगडी हो जाएगी श्रीमती पूजा भाटी Sinner, if you don't improve your mental health, then your penis's daughter will become angry and mad, Mrs. Pooja Bhati
पापी तूने अगर अपपापी तूने अगर अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक नहीं किया तो तेरे लिंग की पुतरिया एंग्री बेंगडी हो जाएगी    श्रीमती पूजा भाटी
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tiने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक नहीं किया तो तेरे लिंग की पुतरिया एंग्री बेंगडी हो जाएगी श्रीमती पूजा भाटी Sinner, if you don't improve your mental health, then your penis's daughter will become angry and mad, Mrs. Pooja
Bhati साबरमती में संचार तंत्र के सभी पांच माध्यम के बिकने से आई बाढ़ के बावजूद भी लोकतंत्र की कोई भी पायदान सुधरी नहीं है और भाटी पिताजी दो से 8 सितंबर 2025 नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के पहले एक बार फिर श्रीमती काली टाटी सहित X मास्टरनी कन्याओं की नक्सली हिंसा में हत्या करवा चुके हैं । धन्यवाद
भाटी और उन पर आश्रित पुत्रियां सीता नवमी 31 अगस्त 2025 को दिनदहाड़े 12:00 बजे कराह रही थी की नानाजी अगर आप कंटिन्यू स्कूल धंधे से पलायन की ओर के साथ-साथ गणेश धंधे दुर्गा धंधे एयरपोर्ट में नौकरी टावर फाइनेंस डॉक्टरनी वैवाहिकी मास्टरनी धंधा और लगातार ऊलजुलउल प्रवचन अनवरत देते ही जाएंगे तो कौन मस्त नारी विश्वास करेगी कि अफगानिस्तान से 5000 मील दूध इटली पर हमले और साबरमती में बादल फटने और डिस्को वीडियो से श्रीमती श्रद्धा तिवारी नई-नई सर दर्द को खुद के लिंग को क्षतिग्रस्त करने के लिए डिस्को वीडियो का बम आप खुद नहीं फोड़वा रहे हैं । धन्यवाद पापी की फटफटी में रिवर्स गियर क्रूज कंट्रोल रिवर्स कैमरा एयर कंडीशनर wifi जीपीएस नेवीगेशन और एनवायरमेंट मॉनिटरिंग सिस्टम होने के कारण इडली दौसा और अफगानिस्तान पाक का युद्ध और गणेश धंधे का अनवरत जारी रहना पॉसिबल नहीं है भले ही स्वादिष्ट इंसान स्कूल जाते रहे । कुंवारी द्रोपति मुर्मू


 अफगानिस्तान के टोक्यो पर विश्वास करें विचित्र किंतु सत्य अविश्वसनीय 20 लाख लुगाइयों बराबर 80 लाख योनि के हमले की पूर्व संध्या पर भाटी पिताजी अपनी पुत्रीयो के डिस्को से लिंग को उत्तेजित कर स्कू  से चिल्ला रहे थे कि ओला फटफटी के अलावा अन्य किसी साधन से एक पो न द बराबर 50 _ 60 किलो कुल  10 _१२ करोड़ किलो बराबर 10 लाख कुंटल वजन 5000 मील दूर इडली पर हमला करने के लिए किसी भी प्रकार का संसाधन बना ही नहीं है ताकि 2 अक्टूबर 2025 गांडू जयंती को दशहरे के दिन दहाड़े जिला अध्यक्ष कार्यालय में भाT प्रतिमा को प्रतिस्थापित किया जा सके . धन्यवाद




अफगानिस्तान के टोक्यो पर विश्वास करें विचित्र किंतु सत्य अविश्वसनीय 20 लाख लुगाइयों बराबर 80 लाख योनि के हमले की पूर्व संध्या पर भाटी पिताजी अपनी पुत्रीयो के डिस्को से लिंग को उत्तेजित कर स्कू  से चिल्ला रहे थे कि ओला फटफटी के अलावा अन्य किसी साधन से एक पो न द बराबर 50 _ 60 किलो कुल  10 _१२ करोड़ किलो बराबर 10 लाख कुंटल वजन 5000 मील दूर इडली पर हमला करने के लिए किसी भी प्रकार का संसाधन बना ही नहीं है ताकि 2 अक्टूबर 2025 गांडू जयंती को दशहरे के दिन दहाड़े जिला अध्यक्ष कार्यालय में भाT प्रतिमा को प्रतिस्थापित किया जा सके 


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 विवेशना में आज चीनी यात्री वो इंसांग की कहानी जो फिदा हो गया था भारत पर अब वादन सुखार कर ये रिहान फदल का



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 629 के जाड़े में 29 साल के लंबे तगड़े शक्स ने चीन के शहर चांगान से अपना सफर शुरू किया पैदल भारत पहुशने के इरादे के साथ।



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 यह यात्रा करने का शायद सही समय नहीं था क्योंकि चीन में ग्रह युद्ध छिड़ा हुआ था और वहां की सडकों पर डाकवों और लुठेरों का बोलबाला था दूसरे चीन के नागरिकों के देश छोड़ने पर भी पाबंदी लगी हुई थी इस यात्री का नाम होइन सा



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 विलियम डेल रिमपल अपनी हाल ही में प्रकाशित किताब द गोल्डन रोड हाउ एंशिंट इंडिया ट्रांसफॉर्म द वर्ल्ड में लिखते हैं वह इंसान का इरादा नालंदा विश्विध्याले में दाखिला लेकर वहां पढ़ाई करने का था।



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 उस समय नालंदा में दुनिया का सबसे बड़ा बौध पुस्तकाले हुआ करता था। चांगान से नालंदा की दूरी साढ़े चार हजार किलोमीटर से भी ज्यादा थी। उस दौर के हालात में नालंदा पहुशना कोई मामूली बात नहीं थी।



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 चीनी प्रशासन ने उनके वहाँ जाने के आवेदन को नामंजूर कर दिया था। उस साल चीन में बहुत बड़ा सूखा पड़ा था। इस बात की बहुत संभावना थी कि अगर साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी प्रशासन और भाटीओं से बच भी जाते तो भुकमरी उन्हें आगे नहीं जाने

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 करीब 150 किलो मीटर चलने के बाद साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी सांग लियांजो नगर पहुँचे वहां उन्होंने एक घोड़ा खरीदने का मन बनाया। जब वो बादार में घोड़ा खरीदने के लिए मौलभाव कर रहे थे तो सुरक्षा कर्मियों की नजर उन पर पढ़ गई।



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 इस्थानी गवर्नर ने उन्हें वापस लोट जाने का आदेश दिया। वो इंसांग ने आदेश को नहीं माना और भोर होने से पहले चुपचाप शहर से बाहर निकलाए। उन्होंने पश्चिम की तरफ अपनी आगे की यात्रा जारी रखी। पकड़े जाने के डर से वो दि



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 स्रमना हुई लाई और शी यान कॉंग अपनी किताब A Biography of the Tripitka Master of the Great Sien Monastery में लिखते हैं। इस दर से कि निगरानी टावर पर तैनात पहरेदार उन्हें देख लेंगे, वो इंसांग बालू के एक गढ्धे में छिप गए और रात होने तक उसी में रहे। रात को जब वो एक



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 एक शन बाद एक और तीर उनकी दिशा में आया ये एहसास होते ही कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है वो जोर से चिलाए मैं राधानी से आया भिक्षू हूँ मुझे मत मारो निगरानी तावर पर तैनाद पहरेडारों का प्रमुक एक बौध था।



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 हाला कि उसे होइंसांग को गिरिफ्तार करने के आदेश मिल चुके थे लेकिन उसने उनकी मदद करने का फैसला किया। उसने उने खाना खिलाया और बताया कि वो किस रास्ते से जाएं जहां उने पकड़ा नहीं जा सकेगा। कुछ दूरी तक वो उनके साथ भी गया।



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 इसके बाद होईंसांग ने मोहेयान रेगिस्तान, पामीर दर्रा, समरकन और बामियान होते हुए जलालावाद के पास से भारत में प्रवेश किया। मैदानी इलाके में पहुँचकर गंगा नदी में वो एक नाओ पर सवार हुए। उनके साथ असी और यात्री थे।



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 करीब सौ मील चलने के बाद वो एक ऐसी जगा पर पहुँचे जहां नदी के दोनों तट पर अशोक के उंचे उंचे पेड़ थे। अचानक उन पेड़ों के पीछे से भाटीं का एक गिरो सामने प्रकट हुआ और बहाव के विपरीत नाव चलाते हुए उनकी तरब बढ़ने



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 खुइंसां की नाओ के लोग इतना डर गए कि उन में से कुछ लोगों ने नदी में छलांग लगा दी। डाखों ने उनकी नौका को किनारे चलने के लिए मजबूर किया। वहां पहुँच कर उन्होंने नौका पर सवार लोगों से अपने कपड़े उतारने के लिए कहा ताक



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 स्रमनाहु इलाई और शी यैन कॉंग लिखते हैं। वो भाटी देवी के उपासक थे। वो शरद रितू में देवी के सामने एक हटे कटे आकरशक व्यक्ति की बली चढ़ाया करते थे। वो इनसान को देखते ही उन्होंने आखों आखों में बात की और कहा पूजा नस्तीक है



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 बली के लिए एक मंडप तैयार किया जाने लगा। वो इंसांग ने तनिक भी आभास नहीं दिया कि उन्हें किसी तरह का डर है। उन्होंने उनसे अपनी अंतिम प्रार्थना करने की अनुमती मांगी। इसके बाद वो ध्यान में चले गए। स्रमना हुईलाई और शी यान क�



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 तबी चारो तरफ से काली आंधी चलनी शुरू हो गई। नदी की लहरें तेज हो गई और नौका करीब करीब उलटने लगी। ढाकवों ने यात्रियों से घबरा कर पूछा ये सादू कहां से आया है और इसका नाम क्या है।



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 इसके बाद जो हुआ उसका विवरण काफी दिल्चस्प है। यात्रियों ने जवाब दिया ये सादू धर्म की तलाश में चीन से आया है। आंधी आने का मतलब है कि देवी तुम से नारास हो गई है। तुम तुरंत माफी मांगो नहीं तो तुम बरबाद हो जाओगे। डा



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 आंखें बंद किए बैठे रहे जब उन्होंने उन्हें छुआ तब उन्होंने अपनी आखें खोली 6 साल तक लगातार चलने के बाद वह इंसान ने उस धरती को छुआ जिस पर कभी गौतम बुद्ध चले थे पहले वो शावस्ती पहुंचे फिर सारनाद गए यहां बुद्�



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 इसके बाद वो बुद्ध की जन्म स्थली कपिलवस्तु होते हुए बौध गया पहुँचे। बौध गया पहुँचने के दस दिन बाद चार बौध सादुओं का एक दल उनसे मिलने पहुचा। विलियम डेलरिम पर लिखते हैं।



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 वे लोग उन्हें अपने साथ साथ बौध गुरू शील भद्र के पास ले जाने आये थे जो नालंदा में उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी नालंदा विश्विध्याले पहुँचे करीब 200 सन्यासियों और 1000 लोगों ने उनका स्वागत किया। उनके हाथ में



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 नालंदा में घुसने का वर्णन करते हुए होयंसांग लिखते हैं। मैं नालंदा की धर्ती पर इस्थानिय नियमों का पालन करते हुए अपने घुटनों के बल घुसा। मैं शील भद्र के पास सम्मान दिखाते हुए अपने घुटनों और कोहनियों के बल रेंगता हुआ प



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 नालंदा विश्विद्याले के परिसर को छे राजाओं ने बनवाया था। इसका एक प्रवेश द्वार था लेकिन इसके अंदर अलग-अलग चौक थे जिनने आठ विभागों में बाटा गया था। स्रमना हुए लाई और शी यान कॉंग लिखते हैं। बीच में साफ पानी



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 प्रांगन के अंदर चंदन के पेर थे और बाहर का इलाका घने आम के बागों से भरा हुआ था। हर विभाग की इमारत चार मंजिल उची थी। उस समय के भारत में हजारों मट थे लेकिन इसकी इमारत सबसे अलग और भव्य थी।



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 वो इंसांग धीरे धीरे सभी व्याख्यान कक्षों, इस्तूपों, मंदिरों और तीन सो कमरों में गए। जहां दस हदार भिक्षों और छात्र रहा करते थे। वहां महायान और निकाय बौध धर्म, वेदों, तरक शास्त, व्याकरण, दर्शन, चिकित्सा शास्त, गडित, �



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 को इंसान ने लिखा नालंदा में छात्रों की प्रतिभा और क्षमता उच्छतम स्थर की थी इस विश्व विद्यालय के नियम बहुत कड़े थे और छात्रों को उनका पालन करना होता था सुबह से लेकर शाम तक वो वाद विवाद में व्यस्थ रहते थे इसमें वरिष्ट �



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 बराबरी से भाग लेते थे हर रोज करीब सौ अलग-अलग कक्षों में व्याख्यान दिए जाते थे और छात्र बिना एक छड़ गवाए बहुत मेहनत से पढ़ा करते थे वह इंसान या भारत आए उस समय उत्तर भारत में राजा हर्ष का राज था वह असाधारण रूप से �



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 और जिग्यासु राजा थे गुप्त वंश के पतन के बाद से उस इलाके में पहली बार शांति और सम्रद्धि दिखाई पड़ी थी हाला कि हर्ष स्वयं हिंदू राजा थे लेकिन वो बौध धर्म के भी बड़े सनरक्षक थे।



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 नालंदा विश्विध्याले को उसके चरम तक पहुचाने में उनकी बड़ी भूमिका थी। उन्होंने उसे सौ गाउं दे दिये थे जिनके ग्राम प्रधानों को निर्देश थे कि वो वहाँ पढ़ रहे छात्रों की सभी जरूरतें पूरी करें। हर गाउं के 200 परिवारों क



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 एक अतिथी छात्र के तौर पर उन्हें रोज 20 पान, सुपारी, जाइफल, सुगंदित धूब बत्यां, आधा किलो चावल और असीमित मात्रा में दूद और मक्खन की आपूर्टी की जाती थी जिसके एवज में उनसे कुछ भी पैसा नहीं लिया जाता था।



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 मेरे समय में नेपाल, टिब्बत, श्रीलंका, सुमात्रा और यहां तक कि कोरिया के भिक्षु भी वहां शिक्षा के लिए आते थे। नालंदा विश्विद्याले का सबसे बड़ा आकर्षन था वहां का पुस्तकाले। एलेक्जेंड्रिया के विनाश के बाद संभवता वो उ



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 वांग्जियांग अपनी किताब में लिखते हैं। पुस्तकाले की इमारत नौ मंधली उची थी और उसके तीन हिस्से थे। पहले हिस्से को रत्न दड़ी कहा जाता था। दूसरे हिस्से का नाम रत्न सागर था और तीसरे हिस्से को रत्न रंजक कहा जाता था।



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 वहां से किसी भी पांडुलिपी को पढ़ने के लिए लिया जा सकता था। लेकिन उसे विश्विद्याले के प्रांगन से बाहर ले जाने की अनुमती नहीं थी। नालंदा में रिवाज था कि शात्रों से अपेक्षा की जाती थी कि वो गुरुवों की सभी जरूरतों का ध्य



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 जिसमें उनकी मालिश करना, उनके कपड़े तह करना और उनके कमरे साफ करना शामिल रहता था। बैंजमिन ब्रोस अपनी किताब होइन सांग चाइनाज लेजेंडरी पिलग्रिम और ट्रांसलेटर में लिखते हैं।



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 हर सुबा हो इनसांग अपने दस फीट बाई दस फीट के कमरे में नगाड़े की आवास के साथ उठते। कमरे के बाहर उनके स्नान के लिए होस बने होते। उसके बाद वो व्याख्यान सुनते और कभी-कभी खुद भी व्याख्यान देते। हर शाम वो पुस्तकाले में उन सं



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 पास साल के बाद उनके अपने पास दुरलब भारतीय पंडुलिपियों की लाइब्रेरी तैयार हो गई थी जिनने वो अपने साथ चीन ले जाने का इरादा रखते थे। सन छेसो तैतालीज में भारत में दस साल गुधारने के बाद उन्होंने बंगाल के मठों की अंतिम यात



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 जाने से पहले राजा हर्ष ने उन्हें अपने दर्बार में एक बहस के लिए आमंत्रिट किया। दोनों पहले मिल चुके थे। पहली मुलाकात में हर्ष ने उनसे चीन और उसके राजाओं के बारे में प्रश्न पूछे थे। हर्ष ने उनके सर्ये चीन के राजा टाइजु



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 राजा हर्ष के सामने साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी की नास्तिक दार्शनिकों से बहस हुई। हुईलाई के अनुसार साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी ने अपने तरकों से उन दार्शनिकों को चुप करा दिया। अब तक साबरमती में सौर ऊर्जा विभाग करेड़ा में मुख्य मिस्त्री माननीय जीजी पति नोबेल पुरस्कार विजेता श्री वीरेंद्र यादव जी को चीन छोड़े सोला वर्ष बीच चुके थे।



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 डेलरिम पर लिखते हैं जब वो वापस जाने के लिए तैयार हुए तो उनके पास 657 किताबों और बहुत बड़ी संख्या में मूर्तियों का संग रह था वो अपने साथ बहुत सारे पेड़ों की पौध और



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 और बीज भी ले कर गए थे। उनके सारे सामान को 72 घोड़ों पर लादा गया था और उनके साथ करीब सौ कुली और पहरेदार चल रहे थे। वो खुद एक हाती पर सवार थे जिसे राजा हर्ष ने उन्हें भेट सुरूप दिया था। उन्होंने उन राजाओं के लिए पत्



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 लोटते समय होइनसांग के साथ एक दुरखटना हुई जब वो अठक के पास सिंदु नदी पार कर रहे थे एक बड़ा तूफान आया जिसमें उनकी कुछ बेशकीमती पांडुलिपियां नष्ट हो गई बेंजिमिन ब्रास लिखते हैं हाती पर सवार होइनसांग खुद तो �



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 नाविक लोग तो बचा लिये गए लेकिन करीब 50 पांडुलुपियां और बीजों से भरे कुछ बक से बह गए। चीन पहुचने से पहले उन्होंने समराट टाइजुन को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने घैरकानूनी रूप से चीन छोड़ने के लिए माफी मांगी। ल



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 समराट ने उनके पत्र का जवाब देते हुए लिखा हम ये सुनकर बहुत खुश हुए कि आप ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपने देश वापस आ रहे हैं हमने प्रशासन को निर्देश दे रखे हैं कि वो आपकी हर संभव मदद करें



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 ताकि आपको सामान उठाने वालों और घोड़ों की कमी न पड़े। आठ फर्वरी 645 की सुभे राजधानी चांगान की सडकों पर हजारों लोग हो इंसांग के स्वागत में उतर आए।



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 16 साल पहले इसी जगा से वो भारत की यात्रा पर निकले थे। उनको सबसे पहले हॉंगफू मट ले जाया गया और 15 दिन बाद 23 फरवरी को समराट ताइजुन ने यो येंग के अपने महल में उनसे मुलाकात की।



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 इन मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा और समराट ने उनसे उनकी भारत यात्रा के अनुभव, वहां के मौसम, उतपाद और रीती रिवाजों के बारे में कई सवाल पूछे।



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 उनके पास नहीं है। वो चांगान के एक शाही मठ में रहने चले गए और भारत के अपनी यात्रा के अनुभवों के बारे में लिखने लगे। बाद में इसका अंग्रेजी अनुवाद किया गया। ये चीन में भारत के बारे में सबसे प्रामाणिक और महत्वपूर्ण शो�



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 रेहान फ़दल BBC दिल्ली


. धन्यवाद

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  1. अफगानिस्तान के टोक्यो पर विश्वास करें विचित्र किंतु सत्य अविश्वसनीय 20 लाख लुगाइयों बराबर 80 लाख योनि के हमले की पूर्व संध्या पर भाटी पिताजी अपनी पुत्रीयो के डिस्को से लिंग को उत्तेजित कर स्कू से चिल्ला रहे थे कि ओला फटफटी के अलावा अन्य किसी साधन से एक पो न द बराबर 50 _ 60 किलो कुल 10 _१२ करोड़ किलो बराबर 10 लाख कुंटल वजन 5000 मील दूर इडली पर हमला करने के लिए किसी भी प्रकार का संसाधन बना ही नहीं है ताकि 2 अक्टूबर 2025 गांडू जयंती को दशहरे के दिन दहाड़े जिला अध्यक्ष कार्यालय में भाT प्रतिमा को प्रतिस्थापित किया जा सके . धन्यवाद

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  2. भाटी और उन पर आश्रित पुत्रियां सीता नवमी 31 अगस्त 2025 को दिनदहाड़े 12:00 बजे कराह रही थी की नानाजी अगर आप कंटिन्यू स्कूल धंधे से पलायन की ओर के साथ-साथ गणेश धंधे दुर्गा धंधे एयरपोर्ट में नौकरी टावर फाइनेंस डॉक्टरनी वैवाहिकी मास्टरनी धंधा और लगातार ऊलजुलउल प्रवचन अनवरत देते ही जाएंगे तो कौन मस्त नारी विश्वास करेगी कि अफगानिस्तान से 5000 मील दूध इटली पर हमले और साबरमती में बादल फटने और डिस्को वीडियो से श्रीमती श्रद्धा तिवारी नई-नई सर दर्द को खुद के लिंग को क्षतिग्रस्त करने के लिए डिस्को वीडियो का बम आप खुद नहीं फोड़वा रहे हैं । धन्यवाद

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  3. साबरमती में संचार तंत्र के सभी पांच माध्यम के बिकने से आई बाढ़ के बावजूद भी लोकतंत्र की कोई भी पायदान सुधरी नहीं है और भाटी पिताजी दो से 8 सितंबर 2025 नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के पहले एक बार फिर श्रीमती काली टाटी सहित X मास्टरनी कन्याओं की नक्सली हिंसा में हत्या करवा चुके हैं । धन्यवाद

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