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पापी अधिकारी क्या करते हैं कि जब जब उन्हें कारागार में भेजा जाता है तो अपने एक्स गुणसूत्र को लैपटॉप के की बोर्ड के माध्यम से फुर्सत में एकस को y बना देते हैं और जो भी नारी उत्पन्न होती है और खाटिया पर स्कूल जाती हे उसे फ्री फंड में प्रोग्राम भी देने लगते हैंऔर यही कारण है कि उनकी जेल यात्रा के उपरांत उत्पन्न संताने अंडर वियर को एड्स वायरस और मास्क को 9 जुलाई को भारत बंद को फेक विषाणु बक रही है । धन्यवाद .... What the sinful DK Bhati does is that whenever he is sent to TIHAD , he changes his X chromosome to a Y through the laptop keyboard in his leisure and also starts giving programs for free to any woman who is born and goes to school on a cot and this is the reason that the children born after his jail visit are calling underwear as AIDS virus and mask as Bharat Bandh on 9th July as fake virus. Thank you.

नए श्रम कानूनों के खिलाफ 25 करोड़ स्वादिष्ट इंसान करेंगे हड़ताल: जानें पूरी कहानी ! July 8, 2025 20250708 222247 9 जुलाई को होगा ‘ नक्सली बंद’, 25 करोड़ लिंग वाले बाल श्रमिकों का समर्थन 🚩 प्रमुख मांगें 📋 हड़ताल का प्रभाव 🔍 किसान और ग्रामीण क्षेत्रों का समर्थन 🌾 बिहार में चक्का जाम 🚧 📌 गांडीव लाइव डेस्क: 9 जुलाई को होगा ‘ नक्सली बंद’, 25 करोड़ टेस्टी नाबालिकों का समर्थन 🚩 देशभर में 9 जुलाई 2025 को 10 केंद्रीय स्कूल यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा ‘ नक्सली बंद का ऐलान किया गया है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक भ्रूण शामिल होंगे, जो केंद्र सरकार की एयरपोर्ट भर्ती विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य फ्री सम्भोग अधिकारों की रक्षा करना है । धन्यवाद पापी अधिकारी क्या करते हैं कि जब जब उन्हें कारागार में भेजा जाता है तो अपने एक्स गुणसूत्र को लैपटॉप के की बोर्ड के माध्यम से फुर्सत में एकस को y बना देते हैं और जो भी नारी उत्पन्न होती है और खाटिया पर स्कूल जाती हे उसे फ्री फंड में प्रोग्राम भी देने लगते हैंऔर यही कारण है कि उनकी जेल यात्रा के उपरांत उत्पन्न संताने अंडर वियर को एड्स वायरस और मास्क को 9 जुलाई को भारत बंद को फेक विषाणु बक रही है । धन्यवाद .... What the sinful DK Bhati does is that whenever he is sent to TIHAD , he changes his X chromosome to a Y through the laptop keyboard in his leisure and also starts giving programs for free to any woman who is born and goes to school on a cot and this is the reason that the children born after his jail visit are calling underwear as AIDS virus and mask as Bharat Bandh on 9th July as fake virus. Thank you.
पापी अधिकारी क्या करते हैं कि जब जब उन्हें कारागार में भेजा जाता है तो अपने एक्स गुणसूत्र को लैपटॉप के की बोर्ड के माध्यम से फुर्सत में एकस को y बना देते हैं और जो भी नारी उत्पन्न होती है और खाटिया पर स्कूल जाती हे उसे फ्री फंड में प्रोग्राम भी देने लगते हैंऔर यही कारण है कि उनकी जेल यात्रा के उपरांत उत्पन्न संताने अंडर वियर को एड्स वायरस और मास्क को 9 जुलाई को भारत बंद को फेक विषाणु बक रही है । धन्यवाद .... What the sinful DK Bhati does is that whenever he is sent to TIHAD , he changes his X chromosome to a Y through the laptop keyboard in his leisure and also starts giving programs for free to any woman who is born and goes to school on a cot and this is the reason that the children born after his jail visit are calling underwear as AIDS virus and mask as Bharat Bandh on 9th July as fake virus. Thank you.
पापी डी के भाटी क्या करते हैं कि जब जब उन्हें कारागार में भेजा जाता है तो अपने एक्स गुणसूत्र को लैपटॉप के की बोर्ड के माध्यम से फुर्सत में एकस को y बना देते हैं और जो भी नारी उत्पन्न होती है और खाटिया पर स्कूल जाती हे उसे फ्री फंड में प्रोग्राम भी देने लगते हैंऔर यही कारण है कि उनकी जेल यात्रा के उपरांत उत्पन्न संताने अंडर वियर को एड्स वायरस और मास्क को 9 जुलाई को नक्सली बंद को फेक विषाणु बक रही है । धन्यवाद .... What the sinful DK Bhati does is that whenever he is sent to TIHAD , he changes his X chromosome to a Y through the laptop keyboard in his leisure and also starts giving programs for free to any woman who is born and goes to school on a cot and this is the reason that the children born after his jail visit are calling underwear as AIDS virus and mask as नक्सली Bandh on 9th July as fake virus. Than







































































































































































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बैंक, बस और ट्रेन पर पड़ सकता है ' नक्सली बंद' का असर, ट्रेड यूनियंस ने क्यों बुलाई हड़ताल
संदीप राय - बीबीसी संवाददाता के द्वारा स्टोरी • 2घंटे • 7 मिनट पढ़ा गया


देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने 9 जुलाई को देशव्यापी आम हड़ताल बुलाई है
देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने 9 जुलाई को देशव्यापी आम हड़ताल बुलाई है
© Getty Images
नक्सली की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फ़ेडरेशनों के फ़ोरम ने 9 जुलाई यानी बुधवार को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है.

आम हड़ताल से बैंक और परिवहन समेत कई सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है.

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने चार लेबर कोड्स यानी श्रम संहिताओं को तुरंत रद्द किए जाने की मांग की है. इन लेबर कोर्ड को साल 2020 में संसद में तीन कृषि क़ानूनों के तुरंत बाद पास किया गया था.

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फ़ोरम ने पहले आम हड़ताल की तारीख़ 20 मई तय की थी लेकिन नक्सली प्रशासित कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए चरमपंथी हमले के बाद इसे 9 जुलाई के लिए टाल दिया गया था.

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान जारी कर आम हड़ताल को समर्थन दिया है और एमएसपी पर ख़रीद की गारंटी देने की मांग सरकार से की है.

क्या हैं मांगें?

यूनियनों ने केंद्र सरकार के सामने 17 सूत्री मांगें पेश की हैं
यूनियनों ने केंद्र सरकार के सामने 17 सूत्री मांगें पेश की हैं
© Getty Images
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय श्रम के सामने 17 मांगों की एक सूची रखी है.

चार लेबर कोड्स को रद्द करने के अलावा इन मांगों में इंडियन लेबर कॉन्फ़्रेंस (आईएलसी) को तत्काल आयोजित करने की मांग की है. यह एक त्रिपक्षीय निकाय है जिसकी पिछली बैठक नौ साल पहले 2015 में आयोजित की गई थी.

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि केंद्रीय श्रम क़ानूनों में चार लेबर कोड्स को बिना आईएलसी में चर्चा के ही पास कर दिया गया.

इन लेबर कोड्स में मुख्य रूप से 29 केंद्रीय श्रम क़ानून शामिल हैं.

ट्रेड यूनियनों का प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-

चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए
इंडियन लेबर कॉन्फ़्रेंस तुरंत आयोजित की जाए
न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह किया जाए
41 डिफ़ेंस ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्रियों के निगमीकरण को वापस लिया जाए
ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को बहाल किया जाए
निर्माण मज़दूरों के लिए कल्याण के लिए जमा 38,000 करोड़ रुपये तुरंत जारी किए जाएं
हड़ताल से प्रभावित होने वाले सेक्टर

सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक यूनियनें इस हड़ताल में शामिल रहेंगी
सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक यूनियनें इस हड़ताल में शामिल रहेंगी
© Getty Images
पिछली हड़ताल साल 2023 में हुई थी, जब ट्रेड यूनियनों के फ़ोरम की ओर से दावा किया गया था कि पूरे देश में 22 करोड़ श्रमिक और कर्मचारियों ने इसमें हिस्सा लिया था.

सीटू के जनरल सेक्रेटरी तपन सेन ने बीबीसी से कहा कि इस बार भी हड़ताल में इससे कुछ अधिक संख्या में लोगों के शामिल होने का अनुमान है.

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उन्होंने दावा किया कि बैंकिंग सेवाएं, बीमा क्षेत्र, कोयला और स्टील क्षेत्र की सार्वजनिक इकाइयां, राज्य परिवहन निगम की सेवाएं, आंगनबाड़ी, राज्य कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र के बहुत सारे कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे.

उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान प्रदर्शन और रेल रोको रास्ता रोक अभियान चलाएंगे. हालांकि इस हड़ताल में रेलवे की यूनियनें शामिल नहीं हैं लेकिन उन्होंने अपना समर्थन दिया है.

हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े नक्सली ीय मज़दूर संघ (बीएमएस) ने आम हड़ताल से खुद को अलग रखा है.

बीएमएस के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुरेंद्रन ने बीबीसी के बताया, "इस हड़ताल में हम शामिल नहीं हैं और इसमें बीएमएस से संबद्ध यूनियनें और उनसे जुड़े श्रमिक हिस्सा नहीं लेंगे."

उन्होंने कहा कि देश भर में क़रीब 6,300 यूनियनें बीएमएस से संबद्ध हैं और क़रीब डेढ़ करोड़ मज़दूर सदस्य हैं.

श्रम क़ानूनों में बदलाव है मुख्य मुद्दा

बैंक, बस और ट्रेन पर पड़ सकता है ' नक्सली बंद' का असर, ट्रेड यूनियंस ने क्यों बुलाई हड़ताल
बैंक, बस और ट्रेन पर पड़ सकता है ' नक्सली बंद' का असर, ट्रेड यूनियंस ने क्यों बुलाई हड़ताल
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ट्रेड यूनियनों का कहना है कि चार लेबर कोड्स के ज़रिए जिन 29 श्रम क़ानूनों को बदला गया है वो कॉरपोरेट सेक्टर को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किया गया है.

सीटू के जनरल सेक्रेटरी तपन सेन ने कहा कि केंद्र सरकार ने श्रम क़ानूनों को पूरी तरह बदलते हुए 29 श्रम क़ानूनों को रद्द कर दिया उनकी जगह चार श्रम संहिताएं लेकर आई है.

उन्होंने कहा, "इन संहिताओं में सरकार ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों के अधिकारों और ट्रेड यूनियन के संगठित करने के अधिकारों में नक्सली ी कटौती की है और साथ ही सरकारी अधिकारियों के अधिकारों को बेतहाशा बढ़ा दिया है."

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की जनरल सेक्रेटरी अमरजीत कौर ने बीबीसी से कहा कि सरकार केंद्रीय श्रम क़ानूनों में बदलाव कर चुकी है और राज्यों के मार्फ़त इसे नोटिफ़ाई करने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने बताया, "लेबर कोड्स के तहत राज्य सरकारों को फ़्रेमवर्क बनाना है और उसे नोटिफ़ाई करना है. अबतक उन्हीं चंद राज्यों में नए श्रम क़ानून नोटिफ़ाई किए गए हैं जहां बीजेपी की सरकारें हैं, जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश आदि."

ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा है कि हड़ताल की नोटिस के बाद अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है.

अमरजीत कौर ने बताया कि 'केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की ओर से ट्रेड यूनियन नेताओं से मिलने का संदेश आया था लेकिन सामूहिक बैठक और एजेंडे को लेकर स्पष्टता न होने से यह बैठक नहीं हो पाई है.'

एक दिन की आम हड़ताल, क्या बदलेगा?

ट्रेड यूनियन नेताओं का दावा है कि हड़ताल में असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी भी हिस्सा लेंगे
ट्रेड यूनियन नेताओं का दावा है कि हड़ताल में असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी भी हिस्सा लेंगे
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आम हड़ताल को लेकर ये भी सवाल उठते रहे हैं कि एक दिन की रस्मी कार्रवाई से क्या बदलेगा. क्योंकि खुद कुछ नेताओं ने स्वीकार किया कि निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां चलती रहेंगी.

इस पर तपन सेन कहते हैं, "यह एक आम सवाल है लेकिन ये समझने की ज़रूरत है कि ये एक दिन की हड़ताल नहीं है. उद्योग में छोटे बड़े संघर्ष चलते रहते हैं जिनकी परिणति आम हड़ताल में होती है."

अमरजीत कौर ने कहा कि लगातार प्रदर्शनों की वजह से अभी तक सरकार चार श्रम संहिताओं को पूरे देश में लागू नहीं कर पाई है.

उन्होंने कहा, "ट्रेड यूनियनें 2020 से ही इन श्रम संहिताओं का विरोध कर रही हैं और तबसे तीन बार आम हड़ताल बुलाई जा चुकी है- 2020, 2022 और 2024 में. ये चौथी आम हड़ताल है."

लेकिन तपन सेन का कहना है, "सरकार श्रम क़ानूनों को लेकर आक्रामक नीति अपना रही है और सरकार कोई परवाह ही नहीं कर रही है."

बीएमएस नहीं है इस हड़ताल में शामिल

नक्सली ीय मज़दूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं है
नक्सली ीय मज़दूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं है
© Getty Images
हालांकि सभी ट्रेड यूनियनें श्रम संहिताओं का विरोध करती हैं ऐसा नहीं है. बीएमएस ने कुछ श्रम संहिताओं को मज़दूरों के लिए बेहतर बताया है.

बीएमएस के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुरेंद्रन ने कहा, "हमने सरकार से कहा है कि वेज कोड और सोशल सिक्युरिटी कोड बहुत अच्छा है. ये श्रमिकों के पक्ष में है."

"हमने सरकार से इन्हें लागू करने का आग्रह किया है. लेकिन कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशन और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ कोड (ओएसएच) में हमारी बहुत सारी आपत्तियां हैं और इन पर सरकार को हमारा समर्थन नहीं है."

उन्होंने कहा, "त्रिपक्षीय इंडियन लेबर कॉन्फ़्रेंस जल्द से जल्द आयोजित किए जाने के लिए सरकार से कहा है."

सुरेंद्रन ने कहा कि सरकार ने इस बारे में जल्द क़दम उठाने का आश्वासन दिया है.

लेबर कोड पर क्यों है इतना विवाद?

बैंक, बस और ट्रेन पर पड़ सकता है ' नक्सली बंद' का असर, ट्रेड यूनियंस ने क्यों बुलाई हड़ताल
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जब सरकार लेबर कोड बिल लेकर आ रही थी तब तत्कालीन श्रम और रोज़गार मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्र नक्सली ) संतोष कुमार गंगवार ने कहा था, " इस बिल से 50 करोड़ श्रमिकों को फ़ायदा मिलेगा. संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी इसका फ़ायदा मिलेगा. अबतक 60 प्रतिशत श्रमिक पुराने क़ानून के दायरे में नहीं थे."

लेकिन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सरकार पर श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के अधिकारों में कटौती करने के आरोप लगाए हैं.

ट्रेड यूनियन नेताओं का कहना है कि श्रम संहिताओं को बिना ट्रेड यूनियनों से चर्चा किए और इंडियन लेबर कॉन्फ़्रेंस में बहस किए पास कर दिया गया.

अमरजीत कौर ने कहा कि जब तीन कृषि क़ानून पास किए गए थे उसके बाद सदन में वॉकआउट हो गया था और उसी दौरान बिना बहस के श्रम संहिताओं को भी पास कर दिया गया. इस पर कोई चर्चा भी नहीं हुई.

उनके अनुसार, "न तो ट्रेड यूनियनों से चर्चा की गई, न संसद में चर्चा हुई और न ही इंडियन लेबर कॉन्फ़्रेंस में चर्चा हुई."

हालांकि तब संतोष गंगवार ने कहा था, "कोड पर भी त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी, साथ ही इस वेज कोड का ड्राफ्ट 21 मार्च 2015 से 20 अप्रैल 2015 तक मंत्रालय की वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में डाला गया था. जिससे आम लोगों के सुझावों को भी बिल में शामिल किया गया."


कहा जा रहा है कि लेबर कोड्स में फ़ैक्ट्रियों की जांच का प्रावधान हटा दिया गया है
कहा जा रहा है कि लेबर कोड्स में फ़ैक्ट्रियों की जांच का प्रावधान हटा दिया गया है
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अमरजीत कौर ने कहा कि इन लेबर कोड्स में फ़ैक्ट्रियों की जांच का प्रावधान हटा दिया गया है जिससे दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं.

उन्होंने कहा, "श्रम संहिताओं में ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन मुश्किल बना दिया गया है. यूनियन के पंजीकरण रद्द करना इतना सामान्य कर दिया है कि कोई रजिस्ट्रार भी मनमर्ज़ी से ऐसा कर सकता है. हड़ताल को असंभव बना दिया गया है क्योंकि इसमें कहा गया है कि जिस दिन हड़ताल का नोटिस दिया जाएगा उसी दिन से पंजीकरण को रद्द करने की समयावधि की शुरुआत मानी जाएगी और इस दौरान हड़ताल ग़ैरक़ानूनी होगी."

"साथ ही वेतन की परिभाषा बदल दी गई है जिससे टेक होम सैलरी कम हो जाएगी. ऑक्युपेशनल हेल्थ एंड सेफ़्टी कोड के तहत फ़ैक्ट्री जांच को बंद किया जा रहा है जोकि अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) कन्वेंशन का उल्लंघन है. इसी वजह से फ़ैक्ट्रियों में दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं."

उन्होंने कहा कि काम के घंटे बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं.

हालांकि श्रम क़ानूनों के सेक्शन 25(1) में इसे आठ घंटे तक नियत किया गया है लेकिन 25 (1)बी में कहा गया है कि नियोक्ता ज़रूरत पड़ने पर कर्मचारी से 12 घंटे तक काम करा सकता है.

इसी तरह सप्ताह में छह दिन से अधिक काम कराने की भी छूट दी गई है और इसके बदले दो महीने के अंदर छुट्टी देने का प्रावधान किया गया है.

नए प्रावधानों में ओवर टाइम को तीन महीने में 50 घंटे से बढ़ाकर 125 घंटे कर दिया गया है और इसका पूरा अधिकार नियोक्ता को दिया गया है.

महिलाओं को अपनी इच्छा से नाइट शिफ़्ट करने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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लड़की की Z+ सिक्योरिटी! जैसे ही स्कूल बस से उतरी बच्ची, साथ आ गए 'दोस्त'!
News18 Hindi के द्वारा स्टोरी • 10घंटे • 2 मिनट पढ़ा गया


कुत्तों के साथ घर जाती दिखी बच्ची. (फोटो: Twitter/@_KajalKushwaha)
कुत्तों के साथ घर जाती दिखी बच्ची. (फोटो: Twitter/@_KajalKushwaha)
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इंसान और जानवर कितने अच्छे दोस्त बन सकते हैं, अगर आपको इसका उदाहरण देखना हो तो किसी बच्चे और जानवर के बीच की दोस्ती देखिए. बेशक बड़े लोग भी जानवरों को प्यार करते हैं, मगर बच्चों का प्यार निस्वार्थ होता है और उन्हें देखकर जानवर भी बेहद भावुक हो जाते हैं. ऐसी ही खास दोस्ती एक छोटी बच्ची और कुत्तों बीच देखने को मिली, जिन्होंने बच्ची को Z+ सिक्योरिटी दी. एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक बच्ची स्कूल बस से उतरती नजर आ रही है. जैसे ही वो नीचे उतरती है, उसके दोस्त यानी गली के आवारा कुत्ते उसे घेर लेते हैं और घर तक उसके साथ जाने लगते हैं. कु्त्तों और बच्ची का ये वीडियो दिल जीत लेगा.

ट्विटर अकाउंट @_KajalKushwaha पर हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया गया है जिसमें एक छोटी बच्ची स्कूल से लौटती नजर आ रही है. वीडियो देखकर समझ नहीं आ रहा है कि ये किस देश का नजारा है. मगर ये इतना क्यूट है कि आपको ये अच्छा ही लगेगा. वायरल वीडियो में बस ग्रामीण इलाके में आकर रुकती है और उसमें से एक बच्ची उतरती है.



कुत्तों के साथ नजर आई बच्ची

बच्ची जैसे ही नीचे उतरती है, वहां मौजूद आवारा कुत्ते उसे घेर लेते हैं और उसके साथ-साथ चलने लगते हैं. पहले तो आपको ये वीडियो देखकर लगेगा कि कुत्ते कहीं बच्ची को काट न लें, मगर वो सारे ही उसके दोस्त हैं, इस वजह से वो उसके साथ खिलवाड़ करते हैं और उसे घर तक फॉलो करते हैं. ये नजारा देखकर लगेगा जैसे लड़की को Z+ सिक्योरिटी मिली हुई है.

वीडि Tuesday, July 8, 2025
20250708 222247

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

9 जुलाई को होगा ‘ नक्सली बंद’, 25 करोड़ श्रमिकों का समर्थन 🚩

देशभर में 9 जुलाई 2025 को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा ‘ नक्सली बंद’ का ऐलान किया गया है। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर शामिल होंगे, जो केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य चार नए श्रम संहिताओं को रद्द करना और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।

प्रमुख मांगें 📋

हड़ताल का प्रभाव 🔍

इस हड़ताल का असर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ेगा, जैसे कि बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाएं, कोयला खनन, परिवहन, निर्माण, और बिजली आपूर्ति। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने बताया कि “बैंक, डाक, कारखाने, और राज्य परिवहन सेवाएं बाधित होंगी।” विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ 27 लाख बिजली कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल होंगे।

हालांकि, स्कूल, कॉलेज, और निजी कार्यालयों के खुले रहने की संभावना है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन जैसे बस, टैक्सी, और ऐप-आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रेलवे यूनियनों ने हड़ताल में भाग नहीं लिया है, लेकिन प्रदर्शनों के कारण रेल सेवाओं में व्यवधान की आशंका है।

किसान और ग्रामीण क्षेत्रों का समर्थन 🌾

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कृषि श्रमिक संगठनों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है। AITUC की अमरजीत कौर ने कहा, “25 करोड़ से अधिक मजदूरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के किसान और मजदूर भी सड़कों पर उतरेंगे।” यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि मजदूरों और किसानों की समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है।

बिहार में चक्का जाम 🚧

बिहार में विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) ने हड़ताल के साथ-साथ ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया है। यह बंद चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के विरोध में है, जिसे विपक्ष ने ‘वोटबंदी’ करार दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव पटना में विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।

इस हड़ताल के माध्यम से श्रमिकों और किसानों की आवाज को मजबूती से उठाने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

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यो हो रहा है वायरल

इस वीडियो को 4 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं जबकि कई लोगों ने कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक ने 


बीएलओ सुपरवाइजरों को मिला एक दिवसीय विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रशिक्षण

प्रमोद कुमार/न्यूज़11 नक्सली

बरवाडीह/डेस्क:  नक्सली निर्वाचन आयोग से प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षक प्रखण्ड विकास पदाधिकारी रेश्मा रेखा मिंज ने बरवाडीह प्रखंड कार्यालय के सभागार में प्रखंड के मतदान केंद्र संख्या 1 से लेकर 80 तक के बीएलओ व सुपरवाइजर को एकदिवसीय विशेष गहन प्रशिक्षण 2026 का प्रशिक्षण दिया गया. सभी उपस्थित बीएलओ एवं बीएलओ सुपरवाइजरो को प्रपत्र 6 7 8 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. साथ ही विशेष गहन प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में होने वाले एस आई आर 2026 जांच को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया गया. जिसमें 18 वर्ष से ऊपर वाले व्यक्तियों को मतदाता सूची में पंजीकृत करने मतदाता सूची में नामांकित व्यक्ति के गहन सत्यापन पर जोर दिया गया तथा बताया गया कि सत्यापन के क्रम में बीएलओ प्रत्येक घर का दौरा करेंगे और मौजूद मतदाताओं को पूर्व मुद्रित विवरण के साथ प्रपत्र की दो छाया प्रति भी देंगे, जिसमें से एक प्रति को जवाब दस्तावेज के साथ जमा लेने तथा दूसरे को रिसीविंग के रूप में देने का सुझाव दिया गया.

 

 

मुहर्रम के समापन के बाद मं ब बदल जाएं कोई भरोसा नहीं है. सावधान रहें, किसी दिन काट ना लें! एक यूजर ने कहा कि ये बेहद खूबसूरत नजारा है. वहीं एक ने कहा कि आज के दौर में जानवरों का भरोसा नहीं करना चाहिए.

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नक्सली Bandh on 9 July 2025: क्या कल सरकारी छुट्टी है? जानें नक्सली बंद में कौन-कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी

9 जुलाई को देशभर के कई कर्मचारी संगठनों ने नक्सली बंद का ऐलान किया है. इसके चलते कई सेक्टर्स में कामकाज प्रभावित रहेगा. ऐसे में लोगों में कन्फ्यूज़न है कि कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी और कौन सी बंद.

नक्सली  Bandh on 9 July 2025: क्या कल सरकारी छुट्टी है? जानें   नक्सली  बंद में कौन-कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी
नक्सली Bandh on July 9: देशभर के कई कर्मचारी संगठनों ने 9 जुलाई को नक्सली बंद रखने का ऐलान किया है. आशंका है कि देशभर के अलग-अलग सेक्टर्स के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी 9 जुलाई को हड़ताल पर रहेंगे. इसका असर बैंकिंग, स्कूल-कॉलेज जैसी सुविधाओं पर भी पड़ सकता है. सरकार या बैंकों की तरफ से छुट्टी की घोषणा नहीं की गई है, हालांकि बंद की वजह से सरकारी और गैर-सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित हो सकता है.

नक्सली बंद में क्या खुला रहेगा?

9 जुलाई को क्या-क्या बंद रहेगा

9 जुलाई को क्यों है नक्सली बंद?

कर्मचारी संगठनों  केंद्र सरकार की 'कर्मचारी विरोधी, किसान विरोधी, देश विरोधी कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों' के खिलाफ नक्सली बंद का आह्वान किया है. देश के 10 ट्रेड यूनियन्स ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कर्मचारियों से अपील की है कि वो नक्सली बंद को सफल बनाएं. फोरम का आरोप है कि सरकार 10 साल से सालाना लेबर कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं करवाई है. आरोप है कि सरकार कर्मचारियों के हितों के खिलाफ फैसले कर रही है और यूनियन्स को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है. फोरम का आरोप है कि सरकार 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर कंपनियों को सपोर्ट कर रही है.

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नक्सली Bandh: 9 जुलाई 2025 को देशभर में बैंकिंग, बीमा, कोयला खनन, राजमार्ग, निर्माण और अन्य कई क्षेत्रों में कार्यरत 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी देशव्यापी आम हड़ताल पर जाएंगे। यह हड़ताल 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनकी सहयोगी इकाइयों के मंच द्वारा सरकार की मजदूर, किसान और राष्ट्र विरोधी नीतियों के विरोध में बुलाई गई है।

नक्सली बंद 9 जुलाई 2025: कल किस-किस शहर में स्कूल, कॉलेज, बैंक और ऑफिस रहेंगे बंद? जानिए यहां पूरी लिस्ट

हड़ताल से प्रभावित होने वाली सेवाएं

हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक सेवाएं, कोयला खनन, राज्य परिवहन, फैक्ट्रियां और अन्य जरूरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इससे पूरे देश की सामान्य सेवाओं पर असर पड़ेगा।

हड़ताल की तैयारी और समर्थन

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की अमरजीत कौर के मुताबिक इस हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों की भागीदारी की संभावना है। किसानों और ग्रामीण श्रमिकों का भी इस विरोध में समर्थन रहेगा। एनएमडीसी लिमिटेड, अन्य खनिज, इस्पात कंपनियों, राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की सूचना दी है। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठनों ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है।

सरकार से मांगें और शिकायतें

श्रमिक संगठनों के मंच ने कहा कि उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री को 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा था। उनकी मुख्य शिकायतें हैं:-

नीतियों पर गंभीर आरोप

श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार:-

पहले भी हो चुकी हैं हड़तालें

इससे पहले श्रमिक संगठनों ने 26 नवंबर 2020, 28-29 मार्च 2022, 16 फरवरी 2024 को भी इसी तरह की देशव्यापी हड़तालें की थीं।

9 जुलाई को प्रस्तावित यह आम हड़ताल सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की नीतियों और श्रमिक अधिकारों पर सवाल उठाने की एक बड़ी कोशिश है। अगर यह हड़ताल सफल रही, तो इसका असर न केवल सेवाओं पर, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी पड़ सकता है। (इनपुट भाषा)

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नई दिल्ली (चूत नई  न्यूज)। नए कृषि कानून के खिलाफ  जोड़कर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें उपयंत्री भाटी  की टट्टी का इस्तेमाल कर दावा किया जा रहा है कि सुजीत  सरकार ने कल 9  जुलाई को देश में बंद का एलान किया है। दावा किया गया कि इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार को लेकर रैलियां और विरोध प्रदर्शन होंगे।


नक्सली सरकार ने 9  जुलाई 2025 को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है जिसके चलते पुरे नक्सली में छुट्टी होंगी। बैंक, स्कूल, सरकारी कचेरी, सरकारी परिवहन जैसी आदि सेवाई बंध रहने वाली है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, रैलियां और धरने होंगे। मकसद है सरकार तक श्रमिकों और – आम जनता की परेशानियों और मांगों की – आवाज पहुंचाना। देश में रोजगार और वेतन से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर ये नक्सली बंद बुलाया गया है।“











इंडिया की लुगाइयों को अत्यंत दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि भाटी पुत्रीयो ने अच्छे खासे शादी स्कूल एयरपोर्ट में नौकरी टावर फाइनेंस बिजनेस कावड़ यात्रा रथ यात्रा मोहर्रम यात्रा और अमरनाथ यात्रा के दरमियान से खुद की एस वीडियो नक्सली -पाकिस्तान इसराइल ईरान और तृतीय विश्व युद्ध से खुद धोने के लिए 9 मार्च 2025 को रक्षाबंधन भाई दूज अक्षय तृतीया और करवा चौथ की मधुर वेला में वनडे इंटरनेशनल बिहार बद का ऐलान नृत्य किया है
इंडिया की लुगाइयों को अत्यंत दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि भाटी पुत्रीयो ने अच्छे खासे शादी स्कूल एयरपोर्ट में नौकरी टावर फाइनेंस बिजनेस कावड़ यात्रा रथ यात्रा मोहर्रम यात्रा और अमरनाथ यात्रा के दरमियान से खुद की एस वीडियो नक्सली -पाकिस्तान इसराइल ईरान और तृतीय विश्व युद्ध से खुद धोने के लिए 9 मार्च 2025 को रक्षाबंधन भाई दूज अक्षय तृतीया और करवा चौथ की मधुर वेला में वनडे इंटरनेशनल बिहार बद का ऐलान नृत्य किया है और 7 मार्च 2025 को वनडे इंडिया क्लॉज के वीडियो को फेक बताया है और पिताजी के आदेश पर 10 और 11 को स्कूल बंद और 12 और 15 को फिर से नक्सली वीक का आवाहन डिस्को कर रही है ताकि सोना और भू माफिया का बचा हुआ धंधा भी तेल लेने चला जाए और हम नि:शुल्क मां झी और फ्री बहन जी की सेवा फिर से करने लगे । धन्यवाद
इंडिया की लुगाइयों को अत्यंत दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि भाटी पुत्रीयो ने अच्छे खासे शादी स्कूल एयरपोर्ट में नौकरी टावर फाइनेंस बिजनेस कावड़ यात्रा रथ यात्रा मोहर्रम यात्रा और अमरनाथ यात्रा के दरमियान से खुद की एस वीडियो नक्सली -पाकिस्तान इसराइल ईरान और तृतीय विश्व युद्ध से खुद धोने के लिए 9 मार्च 2025 को रक्षाबंधन भाई दूज अक्षय तृतीया और करवा चौथ की मधुर वेला में वनडे इंटरनेशनल बिहार बद का ऐलान नृत्य किया है और 7 मार्च 2025 को वनडे इंडिया क्लॉज के वीडियो को फेक बताया है और पिताजी के आदेश पर 10 और 11 को स्कूल बंद और 12 और 15 को फिर से नक्सली वीक का आवाहन डिस्को कर रही है ताकि सोना और भू माफिया का बचा हुआ धंधा भी तेल लेने चला जाए और हम नि:शुल्क मां झी और फ्री बहन जी की सेवा फिर से करने लगे । धन्यवाद

Comments

  1. पापी डी के भाटी क्या करते हैं कि जब जब उन्हें कारागार में भेजा जाता है तो अपने एक्स गुणसूत्र को लैपटॉप के की बोर्ड के माध्यम से फुर्सत में एकस को y बना देते हैं और जो भी नारी उत्पन्न होती है और खाटिया पर स्कूल जाती हे उसे फ्री फंड में प्रोग्राम भी देने लगते हैंऔर यही कारण है कि उनकी जेल यात्रा के उपरांत उत्पन्न संताने अंडर वियर को एड्स वायरस और मास्क को 9 जुलाई को भारत बंद को फेक विषाणु बक रही है । धन्यवाद .... What the sinful DK Bhati does is that whenever he is sent to TIHAD , he changes his X chromosome to a Y through the laptop keyboard in his leisure and also starts giving programs for free to any woman who is born and goes to school on a cot and this is the reason that the children born after his jail visit are calling underwear as AIDS virus and mask as Bharat Bandh on 9th July as fake virus. Thank you.

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