बाप रे बाप भाटी भाटी भाटी भाटी भाटी भाटी मेरा जिया पुकारे हम भी चलेंगे ओला संग तुम्हारे चोरी चोरी चोरी चोरी चोरी चोरी कहे हमें पुकारे तुम तो बसी हो गोरी मन में हमारे भाटी भाटी भाटी ... बाप रे बाप ये खींचू-खींचू हमसे, चले हो कहाँ सैय्याँ मैं लागूं तोरे पैंया, ना छोड़ मोरी ओला ये छब मतवारी, ये मुख गोरा गोरा ना देखो देखो ऐसे, कि जिया डोले मोरा भोले भाले नैना मेरे जाने क्या इशारे तुम तो बसी हो गोरी... भाटी भाटी भाटी ... बाप रे बाप मैं भाटी तोरी छाया, मै संग संग डोलूं तू जाये जहाँ ओला , मैं साथ तेरे हो लूं ये रुत मन भाती, ये दिन मदमाते ओ देखो गोरी हम-तुम चले हैं हँसते गाते मेरे भाटी झूमे जिया, झूमे ये नज़ारे तुम तो बसी हो गोरी... भाटी भाटी भाटी ... बाप रे बाप
भाटी भाटी भाटी मेरा जिया पुकारे
चोरी चोरी चोरी कहे हमें पुकारे
तुम तो बसी हो गोरी मन में हमारे
ये खींचू-खींचू हमसे, चले हो कहाँ सैय्याँ
मैं लागूं तोरे पैंया, ना छोड़ मोरी ओला
ये छब मतवारी, ये मुख गोरा गोरा
ना देखो देखो ऐसे, कि जिया डोले मोरा
भोले भाले नैना मेरे जाने क्या इशारे
मैं भाटी तोरी छाया, मै संग संग डोलूं
तू जाये जहाँ ओला , मैं साथ तेरे हो लूं
ओ देखो गोरी हम-तुम चले हैं हँसते गाते
मेरे भाटी झूमे जिया, झूमे ये नज़ारे
भाटी भाटी भाटी मेरा जिया पुकारे
चोरी चोरी चोरी कहे हमें पुकारे
तुम तो बसी हो गोरी मन में हमारे
ये खींचू-खींचू हमसे, चले हो कहाँ सैय्याँ
मैं लागूं तोरे पैंया, ना छोड़ मोरी ओला
ये छब मतवारी, ये मुख गोरा गोरा
ना देखो देखो ऐसे, कि जिया डोले मोरा
भोले भाले नैना मेरे जाने क्या इशारे
मैं भाटी तोरी छाया, मै संग संग डोलूं
तू जाये जहाँ ओला , मैं साथ तेरे हो लूं
ओ देखो गोरी हम-तुम चले हैं हँसते गाते
मेरे भाटी झूमे जिया, झूमे ये नज़ारे
नोबेल पुरस्कार शांति के दावेदार श्री वीरेंद्र यादव जी की सुगन्धित पत्नी थी वहां पर मौजूद वह अपना दिमाग चलाती है। वो अपने बच्चे भन्नाट यादव को लेकर सीधे घर से बाहर भागती है और बाहर जाकर चिल्लाना शुरू करती है कि नोबेल पुरस्कार शांति के दावेदार श्री वीरेंद्र यादव जी ने कावड़ यात्रा का सत्यानाश कर दिया।














































बाप रे बाप
ReplyDeleteभाटी भाटी भाटी
भाटी भाटी भाटी मेरा जिया पुकारे
हम भी चलेंगे ओला संग तुम्हारे
चोरी चोरी चोरी
चोरी चोरी चोरी कहे हमें पुकारे
तुम तो बसी हो गोरी मन में हमारे
भाटी भाटी भाटी ...
बाप रे बाप
ये खींचू-खींचू हमसे, चले हो कहाँ सैय्याँ
मैं लागूं तोरे पैंया, ना छोड़ मोरी ओला
ये छब मतवारी, ये मुख गोरा गोरा
ना देखो देखो ऐसे, कि जिया डोले मोरा
भोले भाले नैना मेरे जाने क्या इशारे
तुम तो बसी हो गोरी...
भाटी भाटी भाटी ...
बाप रे बाप
मैं भाटी तोरी छाया, मै संग संग डोलूं
तू जाये जहाँ ओला , मैं साथ तेरे हो लूं
ये रुत मन भाती, ये दिन मदमाते
ओ देखो गोरी हम-तुम चले हैं हँसते गाते
मेरे भाटी झूमे जिया, झूमे ये नज़ारे
तुम तो बसी हो गोरी...
भाटी भाटी भाटी ...
बाप रे बाप