प्रवचन .. योनि में दो छेद होते हैं . एक क्रिया कर्म का एक मूत्र त्याग का.. पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो + 2 = 4 पहिए की दहेज की गाड़ी बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी

सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो + 2 = 4 पहिए की दहेज की गाड़ी बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी


 प्रवचन .. योनि में दो छेद होते हैं . एक क्रिया कर्म का एक मूत्र त्याग का..  पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो + 2 = 4 पहिए की दहेज की गाड़ी बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी


पापी जब तूने बिना फट फटी के रूस यूक्रेन भारत पाकिस्तान और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध और तृतीय विश्व युद्ध खत्म कर दिया है तो तुझे दो पहिए की क्या जरूरत थी ? दूदू भी दो होते हैं और पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो पहिए की दहेज की साइकिल बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी 




पापी जब तूने बिना फट फटी के रूस यूक्रेन भारत पाकिस्तान और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध और तृतीय विश्व युद्ध खत्म कर दिया है तो तुझे दो पहिए की क्या जरूरत थी ? दूदू भी दो होते हैं और पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो पहिए की दहेज की साइकिल बहुत जरूरी है । Amar Ujala

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CG Encounter: सुकमा में 'ऑपरेशन मानसून', शहीदी सप्ताह के बीच सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़

अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 29 Jul 2025 10:46 AM IST

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सार

छत्तीसगढ़ के सुकमा में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन मानसून चल रहा है। इसी दौरान अभियान पर निकले सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हो गई। इस दौरान नक्सली अपना शहीदी सप्ताह मना रहे हैं।

छत्तीसगढ़ फटाफट: पढ़ें सभी खबरें 60s में

Encounter between security forces and Naxalites during Naxal martyrdom week in Sukma

मुठभेड़ (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मंगलवार सुबह से ही सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ ऐसे समय पर हो रही है, जब नक्सली अपना शहीदी सप्ताह मना रहे हैं। जिसे लेकर पहले से ही अलर्ट जारी किया गया था।


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शहीदी सप्ताह के दौरान नक्सलियों द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षाबलों ने क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान तेज कर दिया था। इसी क्रम में चलाए जा रहे "ऑपरेशन मानसून" के तहत मंगलवार सुबह डीआरजी और सीआरपीएफ के जवान सर्चिंग पर निकले थे, तभी जंगलों के भीतर घात लगाए बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिससे नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ अभी भी जारी है और सुरक्षाबलों की ओर से पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है। मुठभेड़ स्थल को लेकर फिलहाल किसी भी प्रकार की स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की जा रही है, क्योंकि सुरक्षा कारणों के चलते स्थान की गोपनीयता बनाए रखना प्राथमिकता है।

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आला अधिकारी ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं और क्षेत्र में अतिरिक्त बलों की तैनाती भी की गई है। माना जा रहा है कि मुठभेड़ समाप्त होने के बाद घटनास्थल से हथियार या शवों की बरामदगी हो सकती है, जिसकी पुष्टि बाद में की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां लगातार जंगलों में सर्चिंग तेज किए हुए हैं ताकि नक्सली किसी भी साजिश को अंजाम न दे सकें।

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 डी के भाटी 

प्रवचन .. योनि में दो छेद होते हैं . एक क्रिया कर्म का एक अखिलेश ने ‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".’ पर पूछा सवाल, पीएम मोदी बोले- ‘अंजाम तक पहुंचाए गए पहलगाम के गुनहगार’

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".’ का जिक्र करते हुए विपक्ष के सवालों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया है।

दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जम्मू-कश्मीर में हुए ‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".’ को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा, “हम सब आतंकवादियों के मारे जाने के पक्ष में हैं, लेकिन ये सवाल जरूरी है कि ये ऑपरेशन ठीक उसी वक्त क्यों हुआ, जब संसद में चर्चा चल रही थी? क्या इसका मकसद राजनीतिक लाभ उठाना था?”

पीएम मोदी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए लोकसभा में कहा, “पहलगाम के हमलावरों को कल (सोमवार) हमारे सुरक्षा बलों ने ‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".’ के तहत उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है, लेकिन मैं हैरान हूं कि यहां ठहाके लगाकर पूछा गया कि यह आखिरकार कल ही क्यों हुआ? क्या इस ऑपरेशन के लिए सावन महीने का सोमवार ढूंढा गया था? इन लोगों को क्या हो गया है? हताशा और निराशा इस हद तक।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले कई सप्ताह से यह कहा जा रहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हुआ, वो ठीक है, लेकिन पहलगाम के आतंकियों का क्या हुआ? अब जब उनको अंजाम तक पहुंचाया गया है तो वे पूछ रहे हैं कि कल क्यों हुआ?”

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “शास्त्रों में कहा गया है कि जब राष्ट्र शस्त्र से सुरक्षित होते हैं तो तभी वहां शास्त्र और ज्ञान की चर्चाएं जन्म ले पाती हैं। जब सीमा पर सेनाएं मजबूत होती हैं, तभी लोकतंत्र प्रखर होता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बीते दशक में भारत की सेना के सशक्तिकरण का एक साक्षात प्रमाण है। कांग्रेस के शासन के दौरान सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के बारे में सोचा तक नहीं जाता था। आज भी आत्मनिर्भर शब्द का मजाक उड़ाया गया। हर रक्षा सौदे में कांग्रेस अपने मौके खोजती रहती है। छोटे-छोटे हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भरता यह इनका कार्यकाल रहा है। बुलेटप्रूफ जैकेट और नाइट विजन कैमरा तक नहीं होते थे। ये लिस्ट भी बहुत लंबी है। बोफोर्स और हेलिकॉप्टर हर चीज के साथ घोटाला जुड़ा हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी सेनाओं को आधुनिक हथियारों के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़ा। इतिहास गवाह है कि जब रक्षा के क्षेत्र में भारत की आवाज सुनाई देती थी। जब तलवारों से युद्ध लड़ा जाता था, तब भी भारत में बनी तलवारें श्रेष्ठ मानी जाती थी। मगर, आजादी के बाद रक्षा क्षेत्र में हमारे दायरे को सोच समझकर तबाह कर दिया गया। रक्षा क्षेत्र को दुर्बल किया गया। रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग के लिए रास्ते बंद कर दिए गए। अगर इसी नीति पर हम चलते तो भारत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में सोच भी नहीं सकता था। उन्होंने ये हाल करके रखा था। भारत को सोचना पड़ता कि अगर कोई एक्शन लेना है तो शस्त्र कहां से मिलेंगे, इसकी टेंशन होती। बीते एक दशक में मेक इन इंडिया हथियार सेना को मिले और उन्होंने इस ऑपरेशन में बहुत निर्णायक भूमिका निभाई।”

पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, “एक दशक पहले भारत के लोगों ने संकल्प लिया कि हमारा देश सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र बने। रक्षा, सुरक्षा समेत हर क्षेत्र में बदलाव के लिए ठोस कदम उठाए गए। देश में सेना के अंदर जो बदलाव हुए, वो आजादी के बाद पहली बार हुए हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति का विचार कोई नया नहीं था। दुनिया में इस पर प्रयोग चलते हैं, लेकिन भारत में निर्णय नहीं होते। मगर, हमने ऐसा करके दिखाया और मैं तीनों सेनाओं का अभिनंनदन करता हूं, जिन्होंने यह स्वीकार किया।”

 मूत्र त्याग का.. पो न द में Kuldeep S नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और

DNA: भारत के दो-दो ऑपरेशन से खौफ में पाकिस्तान, कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".से कांपे मुनीर...कश्मीर से PoK तक हड़कंप!

DNA Analysis: भारत में संसद के अंदर आपरेशन सिंदूर पर चर्चा चल रही है. और कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सेना ने आपरेशन कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". लॉन्च किया गया है. भारत में हो रही इन दोनों घटनाओं की खबरें इस वक्त पाकिस्तान में वायरल हैं.

DNA: भारत के दो-दो ऑपरेशन से खौफ में पाकिस्तान, कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन

DNA Analysis: एक तरफ देश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काम की सराहना हो रही है. तो दूसरी तरफ राहुल गांधी और कुछ कांग्रेस नेता पाकिस्तान में भी वायरल हैं. उनके बयानों को पाकिस्तान में खूब दिखाया और सुनाया जा रहा है. पाकिस्तान की नजर भारत की संसद में चल रही आपरेशन सिंदूर पर चर्चा पर टिकी रही. इसके अलावा पाकिस्तानी. कश्मीर में चल रहे कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".पर भी नजर रख रहे हैं. क्योंकि उन्हें डर लग रहा है. कहीं आपरेशन कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". उनके लिए आपरेशन सिंदूर 2.0 ना बन जाए. आज आपको भी पाकिस्तान के इस डर के बारे में जानना चाहिए. और भारत में चलाए जा रहे आपरेशन कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी को समझना चाहिए.

भारत में संसद के अंदर आपरेशन सिंदूर पर चर्चा चल रही है. और कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सेना ने आपरेशन कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". लॉन्च किया गया है. भारत में हो रही इन दोनों घटनाओं की खबरें इस वक्त पाकिस्तान में वायरल हैं. भारत की संसद में बताया जा रहा है. किस तरह आपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की सेना की कमर तोड़ी गई. ये सुनकर पाकिस्तानी सोच रहे हैं. क्या आपरेशन कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". भी धीरे धीरे कश्मीर से पीओके तक ना पहुंच जाए.

तो पाकिस्तानियों को जब से मालूम चला है. पाकिस्तानी मूल के तीन आतंकी भारत में मार दिए गए. और उनके पास से पाकिस्तानी होने का प्रूफ भी मिल गया. पाकिस्तान को आपरेशन सिंदूर 2.0 का खौफ सता रहा है. पाकिस्तान की सेना ने भी खौफ में आकर रोना पीटना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान के जिस डीजीआईएसपीआर ने आपरेशन सिंदूर में खुद को जीता हुआ बताकर जग हंसाई करवाई थी. अब भारत के हमले के खौफ की वजह से अपने देश वासियों को नई कहानी सुना रहा है.

पाकिस्तान को डर क्या है? 

पाकिस्तान को डर है भारत सबूत के साथ आतंकियों को पकड़ने के बाद फिर हमला कर सकता है. इसलिए पाकिस्तान के जनरल कोरी गप सुनाकर अपनी जनता को वैसे ही मूर्ख बना रहे हैं. जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बताया था. दूसरी तरफ भारत के वो नेता पाकिस्तान में हीरो बन गए हैं. जो पकिस्तान से आतंकी आए इस थ्योरी से उलट बयान दे रहे हैं.

पाकिस्तान के टीवी चैनल में उन नेताओं के बयानों के क्लिप्स भी चलाए जा रहे हैं. जो सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने वाले पाकिस्तान की भारत सरकार की थ्योरी पर सवाल पूछ रहे हैं.

यानि पकिस्तान लोकसभा कार्यवाही में अपने काम के बयान तलाश कर रहा है. और ऐसे बयान देने वाले पाकिस्तान की टीवी में खूब चमक रहे हैं. वैसे पाकिस्तानियों ने भारत के आपरेशन के नाम में साजिश तलाश कर ली है. 

'ऑपरेशन का नाम कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".'

हिंदुस्तानियों को पता है ऑपरेशन का नाम कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".. कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". पहाड़ों में हो रहे ऑपरेशन की वजह से रखा गया. लेकिन ज्यादातर पाकिस्तानी इसे सनातन के प्रचार से जोड़ रहे हैं. फिलहाल पाकिस्तानी भारत की संसद से लेकर कश्मीर के पहाड़ों तक नजर गड़ा कर बैठे हुए हैं. क्योंकि उन्हें डर है. पता नहीं किस जगह से उनके लिए ज्यादा बुरी खबर आएगी.

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Operation Sindoor पर Lok Sabha में कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".संग्राम: Rahul Gandhi vs PM Modi, Amit Shah का बड़ा खुलासा

  • 16:40
  • प्रकाशित: जुलाई 29, 2025
सिनेमा व्‍यू

Operation Sindoor Parliament Session: लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर दूसरा दिन, कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".बहस का शानदार मंजर! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकी सुलेमान, जिबरान और अबू हमजा को 'कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".' में ढेर कर दिया गया। शाह ने 74 मिनट के भाषण में मोदी सरकार की आतंकवाद नीति और कांग्रेस की नाकामी पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने सेना की तारीफ की, लेकिन सीजफायर और ऑपरेशन की टाइमिंग पर सवाल दागे। प्रियंका गांधी ने सरकार पर हमले की जिम्मेदारी और पहलगाम की सुरक्षा चूक को लेकर निशाना साधा। मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्रम्प के दावों और सीजफायर पर तंज कसा। राहुल गांधी ने सरकार की चूक और जेट्स के नुकसान पर सवाल उठाए, तो पीएम मोदी ने सेना के शौर्य और विपक्ष पर जोरदार प्रहार किया

ने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू मा
आतंकियों के पास मिले हथियार
Image Source : REPORTERआतंकियों के पास मिले हथियार

सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त, समन्वित और लंबे अभियान में, 28 जुलाई को पहलगाम हमले की साजिश रचने वाले तीन कट्टर पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया। आतंकवादियों की पहचान सुलेमान शाह उर्फ फैसल जाट, हमजा अफगानी और जिबरान भाई के रूप में हुई है। घटनास्थल से दो एके सीरीज राइफलें, एक एम4 राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद और युद्ध सामग्री बरामद की गई है। आधुनिक हथियार और युद्ध सामग्री देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे। 

कैसे हुई पहलगाम आतंकी हमलावरों की पहचान

शनिवार को पहलगाम हमलावरों द्वारा इस्तेमाल किए गए एक चीनी सैटेलाइट फोन से निकले सिग्नल से उनका पता चल गया और उसके बाद सेना ने ऑपरेशन शुरू किया। पिछले 17 दिनों में दूसरी बार सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में दाचीगाम के जंगलों में ज़बरवान रेंज में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ". पीक के लिडवास मैदान के पास मुलनार पीक पर पहुंची और इसे कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".नाम दिया गया।

बरामद हुआ युद्ध का सामान और सैटेलाइट फोन


मारे गए पाकिस्तानी आतंकवादियों के पास से ज़ब्त किए गए हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों सहित वो सैटेलाइट फोन भी मिला जिससे सेना को सुराग मिला था। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इसकी जानकारी दी और बताया कि मारे गए ये तीनों वही आतंकवादी हैं जिन्होंने 22 अप्रैल को 26 नागरिकों की हत्या की थी। सूत्रों के अनुसार इन हमलावरों ने 11 जुलाई को बैसरन इलाके में भी पहलगाम हमले को अंजाम देने से पहले सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया था। तब से सेना और पुलिस की कई टीमें रात में भी उनकी तलाश कर रही थीं, जिससे वो बार-बार अपने ठिकाने बदल रहे थे और जंगल में छुपकर बैठे थे।सूत्रों के मुताबिक आतंकी तंबू में आराम कर रहे थे कि सेना ने उनपर अटैक किया और उन्हें पकड़ लिया, जिसके बाद चली मुठभेड़ में तीनों मारे गए।

  फिया

कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".: आतंकियों की हार और चीनी तकनीक की असफलता, कैसे मारा गया पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड

ऑपरेशन की शुरुआत 18 जुलाई को हुई, जब डाचीगाम नेशनल पार्क के पास संदिग्ध रेडियो संचार को इंटरसेप्ट किया गया. यह सिग्नल ‘T-82 अल्ट्रासेट’ नामक एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन डिवाइस से आया था, जो आमतौर पर हाई-एन्क्रिप्शन वाले सैन्य संचार के लिए प्रयोग होता है और इसकी पहचान करना बेहद कठिन माना जाता है.

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कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन
नई दिल्ली:

श्रीनगर के हरवान इलाके में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता के पीछे एक ऐसी चीनी तकनीक की धोखेबाजी थी, जिस पर आतंकी औरही और उनके आका आंख मूंदकर भरोसा कर रहे थे. यह वही तकनीक थी, जिसने आतंकियों को 96 दिनों तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से दूर रखा. लेकिन अंततः उनकी कब्र भी खुदवाकर दी.

तीन पाकिस्तानी आतंकी ढेर, पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड मारा गया
27 जुलाई को सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के बाहरी इलाके हरवान के पास लिडवास के घने जंगलों में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया. मारे गए आतंकियों में एक की पहचान सुलेमानी शाह के रूप में हुई है जो अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और मुख्य शूटर था. यह मुठभेड़ ‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".' का हिस्सा थी, जिसे खुफिया और तकनीकी निगरानी के बाद अंजाम दिया गया.

ऑपरेशन की शुरुआत 18 जुलाई को हुई, जब डाचीगाम नेशनल पार्क के पास संदिग्ध रेडियो संचार को इंटरसेप्ट किया गया. यह सिग्नल ‘T-82 अल्ट्रासेट' नामक एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन डिवाइस से आया था, जो आमतौर पर हाई-एन्क्रिप्शन वाले सैन्य संचार के लिए प्रयोग होता है और इसकी पहचान करना बेहद कठिन माना जाता है.

सूत्रों के अनुसार, यह वही उपकरण था जिससे 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद संपर्क साधा गया था. इस उपकरण के सक्रिय होते ही सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी. यही तकनीकी चूक आतंकियों पर भारी पड़ी.

चीनी रेडियो सिस्टम: जो ताकत थी, वही कमजोरी बन गई

यह रेडियो सिस्टम चीन की सैन्य-स्तरीय तकनीक है, जो अल्ट्रा हाई फ्रिक्वेंसी बैंड्स पर सुरक्षित संचार की सुविधा देता है. 2016 से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन इसे 'WYSMS' कोडनेम से इस्तेमाल कर रहे थे. इसका एन्क्रिप्शन इतना मजबूत होता है कि इसके सिग्नल्स को पकड़ना लगभग नामुमकिन माना जाता था. लेकिन इस बार, लगातार ट्रांसमिट होते सिग्नल्स ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों की लोकेशन तक पहुंचा दिया. यानी जिस तकनीक को आतंकी अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते थे, वह उनकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई.

11 दिन का ऑपरेशन, घेराबंदी और निर्णायक मुठभेड़

करीब 11 दिनों तक सैटेलाइट ट्रैकिंग, ह्यूमन इंटेलिजेंस, थर्मल इमेजिंग ड्रोन और सिग्नल इंटरसेप्शन के सहारे पूरे दक्षिण कश्मीर में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. अंततः 28 जुलाई को सुबह करीब 11:30 बजे 24 राष्ट्रीय राइफल्स और 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज की संयुक्त टीम ने तीन “हाई वैल्यू” आतंकियों को लिडवास के जंगलों में घेर लिया और मुठभेड़ में मार गिराया. सुलेमानी शाह को लेकर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तान सेना का पूर्व कमांडो था. उसके पास से एक M4 कार्बाइन, दो AK-47 राइफलें, ग्रेनेड, भारी मात्रा में गोला-बारूद और खाने-पीने का सामान बरामद किया गया.

पहलगाम हमले की जांच में बड़ी कामयाबी

22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय टट्टू ऑपरेटर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच में जुटी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी लंबे समय से सुलेमानी शाह की तलाश थी. अब उसकी मौत से इस हमले की जांच को भी निर्णायक दिशा मिल सकती है.

‘कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".' सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ तकनीक और धैर्य से जीती गई एक निर्णायक जंग थी. यह उदाहरण है कि जब आतंकी ताकतें आधुनिक तकनीक का सहारा लेती हैं, तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उससे एक कदम आगे निकलकर उन्हें उन्हीं की चाल में मात दे सकती हैं.

 दोनों धंधे को 15 अग

 कातिल ओला फटफटी के खुनी चके को भाटी पुत्रीयो के पोद में किल्ली लगवाकर पंचर होने से बचाव आंदोलन ".के बाद पहलगाम के आतंकियों की पहचान कैसे हुई?

स्त और रक्षाबंधन दोनों धं Top stories
धे के पहले खत्म
 करने के लिए दो + 2 = 4 पहिए की दहे
 ज की गा
 ड़ी बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी

Comments

  1. पापी जब तूने बिना फट फटी के रूस यूक्रेन भारत पाकिस्तान और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध और तृतीय विश्व युद्ध खत्म कर दिया है तो तुझे दो पहिए की क्या जरूरत थी ? दूदू भी दो होते हैं और पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो पहिए की दहेज की साइकिल बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी

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  2. प्रवचन .. योनि में दो छेद होते हैं . एक क्रिया कर्म का एक मूत्र त्याग का.. पो न द में नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से 3 अगस्त पादने और कंबोडिया थाईलैंड युद्ध हगने के अलग-अलग छेद भी दो होते हैं : इसीलिए सोना और भू माफिया दोनों धंधे को 15 अगस्त और रक्षाबंधन दोनों धंधे के पहले खत्म करने के लिए दो + 2 = 4 पहिए की दहेज की गाड़ी बहुत जरूरी है । उपराष्ट्रपति डी के भाटी

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