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तृतीय विश्व युद्ध समस्या पूपा बी के यादव ने दारू पीकर खत्म कर दी है स्कूल धंधा स्वादिष्ट यादव 15 जुलाई 2025 को खत्म करेंगे और बाकी बची-खुची समस्याएं चकाचक और सुंदर सिंह यादव 15 अगस्त को खत्म कर देंगे भाटी साहब


तृतीय विश्व युद्ध समस्या पूपा बी के

























यादव ने दारू पीकर खत्म कर दी है स्कूल धंधा स्वादिष्ट यादव 15 जुलाई 2025 को खत्म करेंगे और बाकी बची-खुची समस्याएं चकाचक और सुंदर सिंह यादव 15 अगस्त को खत्म कर देंगे भाटी साहब







इंडियन सोसाइटी

में लूगाई तंत्र के चारों









स्तंभों के बिक जाने के बाद नारी

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स्टम भाटी तंत्र का विकास

हुआ है, जिसकी मानसिक दशा तो ठीक है पर लिंग ना तो उत्तेजित होता है ना ही वीरय का स्कलन पिछले 10 साल से हो रहा है .. श्रीमती प्रिया स्वर्णकार और नेहा भगत After the four pillars of women system have been sold in Indian society, the fifth system Bhati system has developed in the female gender, whose mental condition is fine but the penis neither gets excited nor the semen is being released for the last 10 years.. Mrs. Priya Swarnkar and Neha Bhagat
इंडियन सोसाइटी में लूगाई तंत्र के चारों स्तंभों के बिक जाने के बाद नारी जाति में पांचवें सिस्टम भाटी तंत्र का विकास हुआ है, जिसकी मानसिक दशा तो ठीक है पर लिंग ना तो उत्तेजित होता है ना ही वीरय का स्कलन पिछले 10 साल से हो रहा है .. श्रीमती प्रिया स्वर्णकार और नेहा भगत After the four pillars of women system have been sold in Indian society, the fifth system Bhati system has developed in the female gender, whose mental condition is fine but the penis neither gets excited nor the semen is being released for the last 10 years.. Mrs. Priya Swarnkar and Neha Bhagat 


 इंडियन सोसाइटी में लूगाई तंत्र के चारों स्तंभों के बिक जाने के बाद नारी जाति में पांचवें सिस्टम भाटी तंत्र का विकास हुआ है, जिसकी मानसिक दशा तो ठीक है पर लिंग ना तो उत्तेजित होता है ना ही वीरय का स्कलन पिछले 10 साल से हो रहा है .. श्रीमती प्रिया स्वर्णकार और नेहा भगत After the four pillars of women system have been sold in Indian society, the fifth system Bhati system has developed in the female gender, whose mental condition is fine but the penis neither gets excited nor the semen 

चांदीपुरा वायरस का मिला तोड़, वैज्ञानिकों ने इलाज के लिए तैयार की दवा

चांदीपुरा वायरस मच्छरों के माध्यम से फैलता है और कुछ ही घंटों में बच्चों में एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) और मृत्यु का कारण बन सकता है.

चांदीपुरा वायरस से अब डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने इसका इलाज खोज लिया है और अगर सब सही रहा तो दवा भी जल्द दस्तक देगी. दरअसल, चांदीपुरा वायरस के चलते भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अब तक सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई है. करीब 60 साल पुरानी इस जानलेवा बीमारी का अब तक कोई ठोस इलाज नहीं था, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने चांदीपुरा वायरस की दवा की खोज कर ली है, जिसके जरिए मरीज की जान का जोखिम कम किया जा सकता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वायरस सालों से भारत में एक 'खामोश हत्यारा' बना हुआ है. इसके खिलाफ संभावित एंटीवायरल उपचार की तलाश पूरी हुई. आईसीएमआर के पुणे स्थित राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान (NIV) ने अपने सेल और एनिमल मॉडल प्रयोगों में फेविपिराविर नामक दवा को इस घातक वायरस की वृद्धि को रोकने में सक्षम पाया है. यह पहली बार है जब इस जानलेवा वायरस के लिए किसी दवा के प्रभावी होने की पुष्टि वैज्ञानिक रूप से भारत में की गई है.

इंसानों पर जल्द शुरू होगा परीक्षण 

चांदीपुरा वायरस मच्छरों के माध्यम से फैलता है और कुछ ही घंटों में बच्चों में एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) और मृत्यु का कारण बन सकता है. पिछले साल 2024 में गुजरात में इसका प्रकोप सामने आया जो बीते 20 वर्ष में सबसे बड़ा रहा. इस दौरान जून से अगस्त 2024 के बीच गुजरात सहित कई राज्यों में 82 लोगों की मौत हुई जबकि 245 से ज्यादा चपेट में आए. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब फेविपिराविर दवा पर मानव परीक्षण जल्द ही शुरू किए जा सकते हैं. सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों को इस पर ध्यान केंद्रित कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में शामिल करना चाहिए. चांदीपुरा वायरस को अब अविकसित और उपेक्षित वायरस की श्रेणी से निकालकर प्राथमिकता सूची में शामिल करना आवश्यक है.

चांदीपुरा वायरस क्या है?

चांदीपुरा वायरस एक रैब्डोवायरस है, जिसकी खोज सबसे पहले 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी. इसलिए इसका नाम चांदीपुरा रखा गया. यह वायरस बालू मक्खी के काटने से फैलता है और बच्चों में तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले एन्सेफलाइटिस का कारण बनता है, जिसे सामान्य भाषा में दिमागी बुखार कहते हैं. पांच से 15 साल तक के बच्चों को यह सबसे ज्यादा निशाना बनाता है. बुखार, उल्टी, बेहोशी जैसे लक्षण मिलने के साथ ही 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज की मौत हो जाती है.

अब तक सैकड़ों मरीजों की हुई मौत

वायरस का पहला बड़ा नुकसान 2003 में महाराष्ट्र और गुजरात में बच्चों के बीच देखा गया. 2003 से 2004 के बीच इस वायरस के कारण आंध्र प्रदेश में 329 लोग प्रभावित हुए जिनमें 183 लोगों की मौत हुई. वहीं महाराष्ट्र में 114 और गुजरात में 24 लोगों की मौत हुई. साल 2004 से 2011 के बीच गुजरात में 31 लोगों की मौत हुई जबकि 100 से भी ज्यादा लोग चपेट में आए हैं . 2009 से 2011 के बीच अन्य राज्यों में 16 मौत हुईं.

कहां पर वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव?

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों के अलावा छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्र, ओडिशा, बिहार और झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बेल्ट कहा जाता है. यहां हर साल बच्चों में दिमागी बुखार के मामले मिलते हैं. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के चलते अब यह वायरस दक्षिण भारत के कर्नाटक और तमिलनाडु में भी प्रसारित होने की आशंका है.

अब तक कोई प्रभावी वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं

26 जून से 2 जुलाई तक, माओवादियों द्वारा जन पीतुरी सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रूप से, रेल यातायात में व्यवधान हो सकता है। उदाहरण के लिए, दक्षिण पूर्व रेलवे ने किरंदुल तक चलने वाली पैसेंजर और नाइट एक्सप्रेस ट्रेनों को स्थगित कर दिया है, और अब ये ट्रेनें दंतेवाड़ा से विशाखापट्टनम के बीच चलेंगी। 
संक्षेप में, 26 जून से 2 जुलाई तक, माओवादियों द्वारा जन पीतुरी सप्ताह मनाया जाता है, जिसके कार जानिए क्या है जन पितुरी सप्ताह: माओवादी हर साल 5 से 11 जून के बीच जन पितुरी सप्ताह मनाते हैं. माओवादी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने साथियों की याद में यह सप्ताह मनाते हैं. जन पितुरी सप्ताह में माओवादी क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और रेल रूट को ब्लॉक करते हैं. साल 2006 से अब तक माओवादी जन पितुरी सप्ताह मना रहे हैं.10 Jun 2023
 

यात्रीगण कृपया ध्यान दें.. इस रूट पर जाने वाली नाइट एक्सप्रेस और पैसेंजर का संचालन 2 जुलाई तक रद्द, जानिए वजह

रूट पर जाने वाली नाइट एक्सप्रेस और पैसेंजर का संचालन 2 जुलाई तक स्थगित Night Express and Passenger will not go to Kirandul till 2nd July

Edited By :Bhavna Sahu 
Modified Date: June 25, 2023 / 01:33 PM IST
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Published Date: June 25, 2023 1:32 pm IST
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Night Express and Passenger will not go to Kirandul till 2nd July बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादियों का जन पितुरी सप्ताह शुरू होने वाला है। फिर एक बार दक्षिण पूर्व रेलवे के आदेश के तहत 26 जून से 2 जुलाई तक माओवादियों द्वारा मनाए जाने वाले जन पीतुरी सप्ताह को मध्य नजर रखते हुए किरंदुल तक पैसेंजर और नाइट एक्सप्रेस को स्थगित कर दिया गया है। अब इन दोनों ही ट्रेनों को दंतेवाड़ा से विशाखापट्टनम के बीच चलाया जाएगा।

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दरअसल, यात्री रेल सुविधा पर अब भी नक्सल दहशत हावी है। जिस कारण दंतेवाड़ा से किरंदुल के बीच के यात्रियों को ट्रेन के शुरू होने का हफ्ते भर तक इंतजार करना होगा। गौरतलब है कि सबसे ज्यादा माओवादी घटनाएं अक्सर दंतेवाड़ा से किरंदुल स्टेशन के बीच होती हैं। इस वजह से इस जगह पर ट्रेन को स्थगित कर दिया जाता है। अलग बात है कि यात्री ट्रेनों को माओवादियों द्वारा निशाना बनाए जाने का मामला कम है। अक्सर माओवादियों द्वारा माल गाड़ियों को ही नुकसान पहुंचाया जाता है फिर भी एहतियातन रेलवे यह आदेश जारी करता है।  IBC24 से नरेश मिश्रा की रिपोर्ट

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ट्रेन को 26 जून से 2 जुलाई तक रद्द की गई, रेलवे यात्री फटाफट करे चेक
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दरअसल, यात्री रेल सुविधा पर अब भी नक्सल दहशत हावी है। जिस कारण दंतेवाड़ा से किरंदुल के बीच के यात्रियों को ट्रेन के शुरू होने का हफ्ते भर तक इंतजार करना होगा। गौरतलब है कि सबसे ज्यादा माओवादी घटनाएं अक्सर दंतेवाड़ा से किरंदुल स्टेशन के बीच होती हैं। इस वजह से इस जगह पर ट्रेन को स्थगित कर दिया जाता है। अलग बात है कि यात्री ट्रेनों को माओवादियों द्वारा निशाना बनाए जाने का मामला कम है। अक्सर माओवादियों द्वारा माल गाड़ियों को ही नुकसान पहुंचाया जाता है फिर भी एहतियातन रेलवे यह आदेश जारी करता है। ANDESH
यात्रियों को

 60 साल पुरानी बीमारी का मिला इलाज:चांदीपुरा वायरस की दवा तैयार ...

12 hours ago — जिसे सामान्य भाषा में मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है। जानकारी अनुसार यह वायरस पांच से पंद्रह साल तक के बच्चों को सबसे अधिक निशाना बनाता है।।प्राप्त जानकारी अनुसार इस बीमारी के लक्षण बेहोशी उल्टी तथा बुखार . हो सकती है परेशानी : कल से 2 जुलाई तक नहीं चलेगी ये ट्रेन
छत्तीसगढ़

 यात्रियों को हो सकती है परेशानी : कल से 2 जुलाई तक नहीं चलेगी ये ...

यात्रियों को हो सकती है परेशानी : कल से 2 जुलाई तक नहीं चलेगी ये ट्रेन


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नक्सली दहशत की वजह से थमे यात्री ट्रेनों के पहिए:दंतेवाड़ा से किरंदुल नहीं जाएगी दोनों पैसिंजर ट्रेनें, 12 मई तक आवाजाही बंद

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल खौफ की वजह से किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसिंजर और नाइट एक्सप्रेस ये दोनों ट्रेनों के पहिए थम गए हैं। ये दोनों यात्री ट्रेनें 12 मई तक दंतेवाड़ा से आगे किरंदुल नहीं जाएगी। हालांकि, किरंदुल से लौह अयस्क लेकर विशाखापट्टनम तक मालगाड़ियों की आवाजाही बरकरार रहेगी। ईको (ईस्ट कोस्ट) रेलवे मंडल ने यात्री ट्रेनों के बंद को लेकर आदेश जारी किया है।

दरअसल, नक्सल दहशत की वजह से रेलवे ने यात्री ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगाने निर्णय लिया है। एक दिन पहले दंतेवाड़ा-किरंदुल के बीच मालगाड़ी डिरेल हुई थी। रेलवे को संदेह है कि यह नक्सलियों की करतूत है। नक्सलियों का TCOC भी चल रहा है। इसी के तहत रेलवे के अफसरों को आशंका है कि, नक्सली कहीं यात्री ट्रेनों को नुकसान न पहुंचा दें। इसलिए दंतेवाड़ा से किरंदुल के बीच यात्री ट्रेनों के परिचालन पर रोक लगा दिया गया है। ईको रेलवे के डिविजनल कॉमर्शियल मैनेजर एके त्रिपाठी ने आदेश जारी किया है।
नक्सलियों के निशाने पर होता है ट्रैक

किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग हमेशा नक्सलियों के निशाने पर रहा है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों की बात करें तो माओवादियों ने ज्यादातर दंतेवाड़ा जिले के बासनपुर-झिरका के जंगल में रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाया है। साल 2021 में नक्सलियों ने रेलवे ट्रैक उखाड़ कर एक पैसिंजर ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि, ट्रेन की रफ्तार कम थी इसलिए ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। इसके अलावा लौह अयस्क लेकर जा रही कई मालगाड़ियों को भी नक्सलियों ने डिरेल किया है।

पिछले कुछ महीनों में इतने दिन बंद रहा परिचाल

नजनवरी महीने में 7 दिन और फरवरी में सिर्फ एक दिन ट्रेन नहीं चली है।
नक्सली बंद की वजह से 10 मार्च से 15 मार्च के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद रहा। वहीं इसी महीने 23 मार्च से 29 मार्च तक नक्सलियों के साम्राज्यवाद विरोधी सप्ताह के तहत किरंदुल तक ट्रेनें नहीं पहुंची।
25 अप्रैल को माओवादियों ने दंडकारण्य बंद का आह्वान किया था। जिसके चलते 23 अप्रैल से 26 अप्रैल तक यात्री ट्रेनें नहीं चली।
28 अप्रैल से 6 मई के बीच ब्रिज के मेंटेंसन कार्य को लेकर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। यह तारीख बढ़ कर 12 मई हो गई थी।
जून माह में अग्निपथ विरोध के चलते 19 और 20 जून को ट्रेन बंद रही।
इसके अलावा 26 जून से 2 जुलाई तक माओवादियों के आर्थिक नाकेबंदी सप्ताह को देखते ट्रेनों के पहिए थमे थे।
28 जुलाई से 3 अगस्त तक नक्सलियों के शहीदी सप्ताह को देखते हुए ट्रेन के पहिये थम गए थे।
15 और 16 अगस्त को भी ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया था।
नक्सलियों के भाईचारा दिवस को देखते 7 सितंबर से 10 सितंबर तक यात्री ट्रेनें किरंदुल नहीं गई। बाद में यह तारीख बढ़कर 20 सितंबर हो गई थी।
नक्सलियों के कश्मीर डे के चलते 25 से 27 अक्टूबर तक ट्रेनों के पहिए थमे रहे। यात्री ट्रेनें दंतेवाड़ा से आगे किरंदुल नहीं आई।

माओवादियों के आर्थिक नाकाबंदी मनाने को लेकर अलर्ट

जमुई। भाकपा (माओवादी) द्वारा आर्थिक नाकाबंदी एवं दमन विरोधी सप्ताह मनाने को लेकर रेल पुलिस से लेकर जिला पुलिस हाई अलर्ट पर है।

माओवादियों के आर्थिक नाकाबंदी मनाने को लेकर अलर्ट

जमुई। भाकपा (माओवादी) द्वारा आर्थिक नाकाबंदी एवं दमन विरोधी सप्ताह मनाने को लेकर रेल पुलिस से लेकर जिला पुलिस हाई अलर्ट पर है। इस संदर्भ में रेल एसआरपी आमिर जावेद ने सभी रेल थानाध्यक्षों के अलावा सभी स्काउट दलों को भी सतर्क किया है।

जानकारी के अनुसार भाकपा माओवादी संगठन के उग्रवादियों द्वारा 26 एवं 27 जून को आर्थिक नाकाबंदी एवं 26 जून से 2 जुलाई तक दमन विरोधी सप्ताह मनाया जाएगा। ऐसी सूचना आ रही है कि इस दौरान माओवादियों द्वारा कोई बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। किउल-जमालपुर, किउल-जसीडीह एवं किउल-जमालपुर-भागलपुर-बांका रेलखंड पर पड़ने वाले स्टेशन, हॉल्ट सहित रेलवे लाइन, रेलवे पुलिस, रेलवे कर्मचारियों आदि पर भी हमला कर हिसक घटना को अंजाम दिया जा सकता है। इस स्थिति में एसआरपी ने सभी को निर्देश दिया कि रेलवे सुरक्षा बल एवं जिला पुलिस से समन्वय स्थापित करते हुए प्रशासनिक सर्तकता एवं सुरक्षात्मक कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। मार्गरक्षण में प्रतिनियुक्त सभी पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों को ब्रीफिग करते हुए विशेष सावधानी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर जिला प्रशासन द्वारा भी सभी थाना को हाई अलर्ट करते हुए कहा है कि पुलिस गश्ती दल से लेकर हर गतिविधि पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक गतिविधि पर ध्यान बनाए रखने की बात कही गई है। है

 नक्सलियों का दमन विरोधी सप्ताह शुरू

बेअसर रहा नक्सली बंद, निर्माण कार्यों में लगी मशीनें थाना परिसरों में खड़ी करवाई

जगदलपुर नक्सलियों के जनपितुरी सप्ताह मनाने और भारत बंद का बस्तर संभाग में असर नजर नहीं आया। कुछ जगहों को छोड़कर शेष बस्तर में आम दिनचर्या सामान्य रही। जन पितुरी सप्ताह को देखते हुए कुछ जिलों में पुलिस ने अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क, पुल पुलिया और अन्य निर्माण कार्यों में लगी मशीनों को एहतियातन नजदीकी थाना परिसरों में खड़े करवा दिया गया है।

बस्तर संभाग में नक्सली 10 जून से जन पितुरी सप्ताह मना रहे हैं। पहले दिन नक्सलियों ने भारत बंद का आह्वान किया था। बंद को देखते हुए बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव जिलों में पुलिस एहतियात बरत रही है, बावजूद नक्सली कोंटा में बड़ी वारदात करने में सफल हो गए। लंबे समय बाद बीजापुर जिले में नेशनल पार्क एरिया में सुधाकर के मारे जाने के बाद बीजापुर सड़क में नक्सलियों ने अपनी मौजूदगी का अहसास करवाने और भड़ास निकालने के लिए ट्रक को आग के हवाले कर दिया। वही दोबारा सालों पुराने पैतरे को अपनाते हुए नक्सलियों ने दंतेवाड़ा बीजापुर सुकमा में छिटपुट वारदातों को अंजाम दिया। नक्सली सात दिन तक जन पितुरी सफ्ताह मानते हैं, लेकिन इसका असर बस्तर में कही नही दिखा। सिर्फ बीजपुर और सुकमा में घटना के बाद अब पूरे बस्तर के नक्सल क्षेत्रों में निर्माण कार्य मे एहतियात बरती जा रही है घोर नक्सल प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में नक्सली बंद को व जन पितुरी सप्ताह लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है। नक्सल क्षेत्रों में कई दिनों से निर्माण कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। वही तीनो जिलो में जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। सड़क और रेलवे निर्माण कार्य में लगी मशीनरी को सुरक्षित भांसी थाने के सामने खड़ा करवा दिया गया था है। बाकी जिलों में भी ऐसा ही कदम उठाया गया है।

नक्सलियों ने जनपितुरी सप्ताह (Jan Pituri week of Naxalites) मनाने का ऐलान किया है. जिसे लेकर रेलवे सतर्क है. जगदलपुर रूट पर ट्रेनों को एहतियातन कैंसिल कर दिया गया है

जगदलपुर: बस्तर में वैसे ही ट्रेनों की कमी है. बस्तरवासियों की मांग और आंदोलन के बाद कुछ यात्री ट्रेनों को तो संचालित किया जाता है, लेकिन इन ट्रेनों पर भी यात्री भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. नक्सलियों के दहशत से कई बार आनन-फानन में ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता है और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है. फिर से यात्री ट्रेनों को आनन फानन में 12 जून तक रद्द किया गया है. जिसकी मुख्य वजह नक्सलियों का जनपितुरी सप्ताह है.

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5 जून से जनपितुरी सप्ताह: दरअसल, नक्सली 5 जून से जनपितुरी सप्ताह मनाते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए ECO रेलवे प्रबंधन ने 12 जून तक जगदलपुर से किरंदुल के बीच यात्री ट्रेन नहीं चलाने का निर्णय लिया है. 5 जून को विशाखापट्टनम से जगदलपुर पहुंची, पैसेंजर किरंदुल के लिए रवाना हो चुकी थी, जिसे रास्ते से वापस बुलवाया गया.

यात्री ट्रेनों की नहीं मिलेगी सहूलियत: रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, विशाखापट्टनम से चलकर किरंदुल तक आने वाली नाइट एक्सप्रेस और विशाखापट्टनम से चलकर किरंदुल जाने वाली पैसेंजर ट्रेन का संचालन 12 जून तक स्थगित रहेगा. किरंदुल और दंतेवाड़ा सेक्शन के अंतर्गत आने वाले सभी स्टेशनों में इस दौरान यात्री ट्रेन की सहूलियत नहीं मिल पाएगी.

वैकल्पिक इंतजाम: ECO रेलवे प्रबंधन के सीपीटीएम ने शनिवार की देर शाम आदेश जारी किया. जिसके बाद तय समय पर यहां से किरंदुल के लिए रवाना हो चुकी पैसेंजर को दंतेवाड़ा से वापस लौटने के आदेश दिए गए. एकाएक ट्रेन को रद्द किए जाने से उसमें सवार 30 से अधिक यात्री स्टेशन से बाहर निकलकर पैदल किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचे. फिर गंतव्य के लिए रवाना हु देश के अनुसार 2
बेअसर रहा नक्सली बंद, निर्माण कार्यों में लगी मशीनें थाना परिसरों में खड़ी करवाई

Naxalite Bandh Remained Ineffective : जगदलपुर। नक्सलियों के जनपितुरी सप्ताह मनाने और भारत बंद का बस्तर संभाग में असर नजर नहीं आया। कुछ जगहों को छोड़कर शेष बस्तर में आम दिनचर्या सामान्य रही। जन पितुरी सप्ताह को देखते हुए कुछ जिलों में पुलिस ने अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क, पुल-पुलिया और अन्य निर्माण कार्यों में लगी मशीनों को एहतियातन नजदीकी थाना परिसरों में खड़े करवा दिया गया है।

बस्तर संभाग में नक्सली 10 जून से जन पितुरी सप्ताह मना रहे हैं। पहले दिन नक्सलियों ने भारत बंद का आह्वान किया था। बंद को देखते हुए बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव जिलों में पुलिस एहतियात बरत रही है। इसके बावजूद नक्सली कोंटा में बड़ी वारदात करने में सफल हो गए। लंबे समय बाद बीजापुर जिले में नेशनल पार्क एरिया में सुधाकर के मारे जाने के बाद बीजापुर सड़क में नक्सलियों ने अपनी मौजूदगी का अहसास करवाने और भड़ास निकालने के लिए ट्रक को आग के हवाले कर दिया।

वहीं, दोबारा सालों पुराने पैंतरे को अपनाते हुए नक्सलियों ने दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा में छिटपुट वारदातों को अंजाम दिया। नक्सली सात दिन तक जन पितुरी सप्ताह मनाते हैं, लेकिन इसका असर बस्तर में कहीं नहीं दिखा। सिर्फ बीजापुर और सुकमा में घटना के बाद अब पूरे बस्तर के नक्सल क्षेत्रों में निर्माण कार्य मे एहतियात बरती जा रही है।

घोर नक्सल प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में नक्सली बंद को व जन पितुरी सप्ताह लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर है। नक्सल क्षेत्रों में कई दिनों से निर्माण कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। वही तीनों जिलों में जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। सड़क और रेलवे निर्माण कार्य में लगी मशीनरी को सुरक्षित भांसी थाने के सामने खड़ा करवा दिया गया था है। बाकी जिलों में भी ऐसा ही कदम उठाया गया है।


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नक्सलियों का जनपितुरी सप्ताह शुरू, श्रद्धांजलि सभा के बहाने गांवों में करते हैं अपना संगठन मजबूत, फोर्स भी अलर्ट

जून 2020 से जून 2021 के बीच दंतेवाड़ा में नक्सलियों पर जवान भारी रहे। नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र पोटाली टेटम चिकपाल झिरका बारसूर पल्ली जैसे क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ कमजोर हुई। इन गांवों तक सड़क बनने से क्षेत्र जवानों के कब्जे में आ गए हैं।

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नक्सली जनपितुरी में किसी वारदात को अंजाम न दे सकें, इसके लिए की गई पूरी तैयारी

दंतेवाड़ा, जेएनएन। शनिवार से नक्सलियों का जनपितुरी सप्ताह शुरू हो गया है। यह 11 जून तक चलेगा। इस दौरान वे मुठभेड़ों में मारे गए नक्सलियों की श्रद्धांजलि सभा के बहाने गांवों में अपना संगठन मजबूत करते हैं। ग्रामीणों को एकत्र कर फोर्स पर बड़ा हमला भी करते हैं। इसके चले पुलिस अलर्ट हो गई है। टीसीओसी (टेक्निकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन) के बाद अब जनपितुरी में भी दंतेवाड़ा में नक्सलियों का दांव उल्टा पड़ सकता है।

जून 2020 से जून 2021 के बीच दंतेवाड़ा में नक्सलियों पर जवान भारी रहे। नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र पोटाली, टेटम, चिकपाल, झिरका, बारसूर, पल्ली जैसे क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ कमजोर हुई। इन गांवों तक सड़क बनने से क्षेत्र जवानों के कब्जे में आ गए हैं। नक्सली इन्हीं क्षेत्रों में अपने बंद के दौरान बैठक-सभा करते थे। अब ये क्षेत्र नक्सल मुक्त की ओर बढ़ रहे हैं। मा

माओवादियों का जन पितुरी सप्ताह शुरू, थमे बस-ट्रेन के पहिए

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शुक्रवार से माओवादियों का जन पितुरी सप्ताह शुरू हो गया है। इसके चलते माओवादियों ने दोरनापाल -जगरगुंडा मुख्य मार्ग पर बैनर पोस्टर लगाकर 5 जून से 12 जून तक जनपितुरी सप्ताह मनाने की अपील की है।

जन पितुरी सप्ताह के दौरान माओवादी वारदातों की आशंका को देखते हुए रेलवे ने किरंदुल-विशाखापत्तनम पैसेंजर को 11 जून तक नहीं चलाने का निर्णय लिया है।

यह ट्रेन विशाखापत्तनम-जगदलपुर के बीच चलेगी, जगदलपुर से किरंदुल के बीच इसे एक सप्ताह के लिए रद्द कर दिया गया है। साथ ही केके रेल लाइन में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

यह है जन पितुरी सप्ताह


पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने साथियों की याद में माओवादी हर साल पांच से 12 जून के बीच यह सप्ताह मनाते हैं, इस दौरान वे क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और रेल मार्ग अवरुद्ध कर देते हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादियों का जन पितुरी सप्ताह शुरू हो गया है। नक्सलियों ने दोरनापाल -जगरगुंडा मुख्य मार्ग पर बैनर पोस्टर लगाकर 5 जून से 12 जून तक जनपितुरी सप्ताह मनाने की अपील की है। सप्ताह के पहले ही दिन नक्सलियों ने पालनार के साप्ताहिक बाजार में एक व्यापारी मोहन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, उसे इलाज के जगदलपुर के महारानी अस्पताल ले जाया गया है। नक्सली वारदातों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने किरंदुल-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस का परिचालन जगदलपुर से किरंदुल के बीच बंद कर दिया है।
साप्ताहिक बाजार में व्यापारी पर हुए हमले के बाद भगदड़ मच गई। इसका फायदा उठाते हुए नक्सलियों ने सुरक्षा में तैनात एसटीएफ के जवानों पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली मौके से भाग गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नक्सलियों की मिनी स्पेशल टीम ने इस घटना को अंजाम दिया है। पुलिस ने बंडी नाम के एक हमलावार को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है जन पितुरी सप्ताह
पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने साथियों की याद में नक्सली हर साल पांच से १२ जून के बीच यह सप्ताह मनाते हैं, इस दौरान वे क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और रेल मार्ग अवरुद्ध कर देते हैं। वर्ष 2006 से अब तक जन पितुरी सप्ताह के दौरान नक्सलियों ने कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया है। इस दौरान रेल, सड़क, बिजली के खंभे, साप्ताहिक बाजार आदि नक्सलियों के निशाने पर रहते हैं। जन पितुरी सप्ताह को नक्सली क्रांतिकारी ढंग से मनाते हैं इसलिए इस दौरान नक्सली वारदातों की संभावना बनी रहती है। नक्सली बस्तर क्षेत्र के अंदरूनी गांवों में पर्चे छोड़कर जन पितुरी उत्सव में शामिल होने और सुरक्षा बलों का सहयोग न करने की अपील करते हैं।
जन पितुरी सप्ताह के दौरान नक्सल वारदातों की आशंका को देखते हुए रेलवे ने किरंदुल-विशाखापत्तनम पैसेंजर को 11 जून तक नहीं चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन विशाखापत्तनम-जगदलपुर के बीच चलेगी, जगदलपुर से किरंदुल के बीच इसे एक सप्ताह के लिए रद्द कर दिया गया है। साथ ही केके रेल लाइन में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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बीजापुर। जिले के इंद्रवती नेशनल पार्क के 2799 वर्ग किमी में फैले एक मात्र बचे सुरक्षित इलाका अब नक्सलियों के लिए मुठभेड जोन बन चुका है। सुरक्षा बलों के जवान इंद्रवती नेशनल पार्क के एक बड़े हिस्से को घेरा हुआ है और जवान लगातार सर्चिग करते हुए नक्सलियों को ढेर कर रहे हैं। इंद्रावती टाइगर नेशनल पार्क में सुरक्षाबलों ने बड़े नक्सलियों को घेरा हुआ है, सुरक्षाबल के जवान पिछले चार दिनों से यहां नक्सल विरोधी अभियन जारी रखे हुए हैं।
जवानों ने यहां सुधाकर सहित कई बड़े नक्सलियों को ढेर कर दिया है, इसके अलावा हिड़मा, पापा राव जैसे बड़े कैडर के नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने घेर रखा है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों में नक्सलियों के मारे जाने का आंकड़ा बढ़ सकता है। जंगल के सूत्रों के अनुसार नक्सली प्रति वर्ष 5 से 11 जून तक जनपितुरी सप्ताह मनाते हैं। नक्सली इस वर्ष जनपितुरी सप्ताह का आयोजन इंद्रावती टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क के एरिया के अलग-अलग गांवों में होना था। जिसे लेकर यहां बड़े कैडर के नक्सलियों का जमावड़ा नेशनल पार्क के जंगल में था, जिसकी सटीक सूचना पर सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को इस इलाके में घेर लिया, और 5 जून को नक्सलियों के जनपितुरी सप्ताह के पहले दिन एक करोड़ का इनामी सुधाकर मारा गया। इस वर्ष 5 जून से 11 जून तक मनाये जाने वाले नक्सलियों के जनपितुरी सप्ताह मेें कितने नक्सलियों का खात्मा होता है, यह आने वाले दिनों ज्ञात होगा ।
नक्सली मारे गए अपने साथियों की याद में 5 से 11 जून तक मनाते हैं, जनपितुरी सप्ताह
नक्सली प्रति वर्ष 5 जून से 11 जून तक जनपितुरी सप्ताह मनाते हैं, इस दौरान नक्सलियों द्वार पूरे सप्ताह अलग-अलग इलाकों और गांवों में अपने मारे गए नक्सली साथियों की याद में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित करते हैं। इन सभाओं में वे अपने कैडर को वीर पुरूष बताते हुए जनता के लिए अपनी जान का बलिदान देने वाला बताते हैं । इस सप्ताह के दौरान नक्सली अपने कोर इलाकों में बैठक करके नई रणनीतियां बनाते हैं। इसके साथ ही संगठन को मजबूत और विस्तार करने की भी तैयारी की जाती है। नक्सली जनपितुरी सप्ताह के दौरान छोटी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में भी रहते हैं। इस दौरान रेल, सड़क, बिजली के खंभे, साप्ताहिक बाजार जैसे जगह नक्सलियों के निशाने पर रहते हैं। इसके अलावा बताने की कोशिश करते हैं कि उनके प्रभाव वाले इलाके में जनता उनके साथ है। वर्ष 2006 से अब तक नक्सली जन पितुरी सप्ताह मना रहे हैं। इस दौरान प्रति वर्ष नक्सलियों के दहशत से यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता था, वहीं नक्सली बड़ी संख्या में बैनर-पोस्टर लगाकर इसका एलान कर बस्तर के जंगल में हजारो की संख्या में ग्रामीणों को एकत्र कर खुलेआम बड़े-बड़े नक्सल स्मारक बनाकर नाच-गाने के साथ जनपितुरी सप्ताह मनाते हुए शक्ति प्रर्दशन करते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष नक्सली संगठन जनपितुरी सप्ताह मनाने की स्थित में नही है, और अपनी जान बचानें में लगे हुए हैं।
बस्तर आईजी सुदरराज पी. ने बताया कि नक्सली समय-समय पर कई तरह के सप्ताह मनाते हैं, नक्सली इसके जरिए इलाके में आतंक का माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। लेकिन अब बस्तर में नक्सली मोर्चे पर तैनात सुरक्षाबल के जवान नक्लवाद के खात्में के लिए तय लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं । बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सली मुक्त करने का जो लक्ष्य सुरक्षाबलों को दिया है, उसके पहले ही बस्तर के सभी जिलों से नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादियों का जन पितुरी सप्ताह शुरू हो गया है। नक्सलियों ने दोरनापाल -जगरगुंडा मुख्य मार्ग पर बैनर पोस्टर लगाकर 5 जून से 12 जून तक जनपितुरी सप्ताह मनाने की अपील की है। सप्ताह के पहले ही दिन नक्सलियों ने पालनार के साप्ताहिक बाजार में एक व्यापारी मोहन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, उसे इलाज के जगदलपुर के महारानी अस्पताल ले जाया गया है। नक्सली वारदातों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने किरंदुल-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस का परिचालन जगदलपुर से किरंदुल के बीच बंद कर दिया है।
साप्ताहिक बाजार में व्यापारी पर हुए हमले के बाद भगदड़ मच गई। इसका फायदा उठाते हुए नक्सलियों ने सुरक्षा में तैनात एसटीएफ के जवानों पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली मौके से भाग गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नक्सलियों की मिनी स्पेशल टीम ने इस घटना को अंजाम दिया है। पुलिस ने बंडी नाम के एक हमलावार को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है जन पितुरी सप्ताह
पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अपने साथियों की याद में नक्सली हर साल पांच से १२ जून के बीच यह सप्ताह मनाते हैं, इस दौरान वे क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और रेल मार्ग अवरुद्ध कर देते हैं। वर्ष 2006 से अब तक जन पितुरी सप्ताह के दौरान नक्सलियों ने कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया है। इस दौरान रेल, सड़क, बिजली के खंभे, साप्ताहिक बाजार आदि नक्सलियों के निशाने पर रहते हैं। जन पितुरी सप्ताह को नक्सली क्रांतिकारी ढंग से मनाते हैं इसलिए इस दौरान नक्सली वारदातों की संभावना बनी रहती है। नक्सली बस्तर क्षेत्र के अंदरूनी गांवों में पर्चे छोड़कर जन पितुरी उत्सव में शामिल होने और सुरक्षा बलों का सहयोग न करने की अपील करते हैं।
जन पितुरी सप्ताह के दौरान नक्सल वारदातों की आशंका को देखते हुए रेलवे ने किरंदुल-विशाखापत्तनम पैसेंजर को 11 जून तक नहीं चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन विशाखापत्तनम-जगदलपुर के बीच चलेगी, जगदलपुर से किरंदुल के बीच इसे एक सप्ताह के लिए रद्द कर दिया गया है। साथ ही केके रेल लाइन में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

माओवादियों के जन पितुरी सप्ताह को देखते हुए अर्धसैनिक बल एक्टिव मोड पर है. सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त जारी है. ताकि माओवादियों के मनसूबों को नाकाम किया जा सके.



"नक्सली समय समय पर कई तरह के सप्ताह मनाते हैं. नक्सली इसके जरिए इलाके में आतंक का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन बस्तर में नक्सली मोर्चे पर तैनात सुरक्षाबल के जवान ऐसे समय में अलर्ट मोड पर रहते हैं. सुरक्षाबल नक्सलियों की साजिश को विफल करने में जुटे रहते हैं." - सुंदरराज पी, बस्तर रेंज के आईजी ने वाले जन पीतुरी 
एनआईवी के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि फेविपिराविर को सेल कल्चर और चूहों पर किए गए प्रयोगों में असरदार पाया गया. इस दवा ने वायरस की प्रजनन दर को काफी हद तक कम किया, जिससे यह संभावित इलाज के रूप में उभरी है. अब रिसर्चर अन्य केमिकल्स की स्क्रीनिंग कर रहे हैं ताकि इससे भी अधिक प्रभावी दवाएं खोजी जा सकें. उन्होंने कहा कि यह खोज चांदीपुरा वायरस के इलाज में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है. अब तक इस वायरस के खिलाफ कोई प्रभावी वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं था और इसका असर विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों पर होता रहा है. is being released for the last 10 years.. Mrs. Priya Swarnkar and Neha Bhagat

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  1. इंडियन सोसाइटी में लूगाई तंत्र के चारों स्तंभों के बिक जाने के बाद नारी जाति में पांचवें सिस्टम भाटी तंत्र का विकास हुआ है, जिसकी मानसिक दशा तो ठीक है पर लिंग ना तो उत्तेजित होता है ना ही वीरय का स्कलन पिछले 10 साल से हो रहा है .. श्रीमती प्रिया स्वर्णकार और नेहा भगत After the four pillars of women system have been sold in Indian society, the fifth system Bhati system has developed in the female gender, whose mental condition is fine but the penis neither gets excited nor the semen is being released for the last 10 years.. Mrs. Priya Swarnkar and Neha Bhagat

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